सिरोही: पिण्डवाड़ा तहसील के वाटेरा, भीमाना, भारजा और रोहिड़ा क्षेत्र की करीब 12 गावों की 800.99 हेक्टेयर भूमि पर प्रस्तावित मेसर्स कमलेश मेटा कास्ट प्राइवेट लिमिटेड की चूना-पत्थर खनन परियोजना के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। दो महीने से अधिक समय से धरना-प्रदर्शन और ग्रामसभाओं के बावजूद सरकार की ओर से कोई संतोषजनक समाधान न मिलने से लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है।
हाल ही में क्षेत्रीय प्रतिनिधि मंडल की मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात भी बेनतीजा रही। ग्रामीणों का कहना है कि मुख्यमंत्री की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया गया, जिससे अब आंदोलन को ही अंतिम उपाय माना जा रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता और विपक्ष दोनों ही पक्ष उनके समर्थन में आगे नहीं आए हैं।
इधर, भारतीय किसान संघ ने भी खुलकर ग्रामीणों का साथ देते हुए सरकार को अल्टीमेटम दिया है। गुरुवार को अतिरिक्त जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में संघ ने चेतावनी दी कि यदि परियोजना को समय रहते निरस्त नहीं किया गया, तो ज़िला स्तरीय बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस दौरान जिला मंत्री उत्तम सिंह, अध्यक्ष मावा राम चौधरी और युवा संभाग प्रमुख मुकेश पाल रावल सहित कई किसान नेता मौजूद रहे।
उधर, भीमाना ग्राम पंचायत में विशेष ग्राम सभा आयोजित की गई, जिसमें प्रशासक व कार्यवाहक सरपंच हेमेंद्र सिंह की अध्यक्षता में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से खनन परियोजना का विरोध किया। सभा में पुराने सभी सहमति पत्र, सुझाव पत्र और एनओसी को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया गया। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि “प्राण चले जाएं, पर खनन किसी हाल में स्वीकार नहीं।”
क्षेत्र के गांवों में लगातार बैठकों का दौर जारी है और ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकार ने परियोजना वापस नहीं ली तो आने वाले दिनों में बड़ा जन-आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह विरोध अब सिरोही जिले में व्यापक जन-आक्रोश का रूप ले चुका है और ग्रामीणों का कहना है कि खनन परियोजना रद्द होने तक संघर्ष जारी रहेगा।