दीक्षांत: शिक्षा से नई शुरुआत

By admin
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राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने कहा कि दीक्षांत का अर्थ शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि अर्जित योग्यताओं से जीवन की नई शुरुआत है। उन्होंने विद्यार्थियों को बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग राष्ट्र और समाज की उन्नति में करें। उन्होंने कहा कि गुरु गोविंद जनजातीय विश्वविद्यालय से अपेक्षा है कि जनजाति क्षेत्र में उच्च शिक्षा का प्रभावी प्रचार हो और जनजातीय वर्ग के बच्चों की संख्या बढ़े, ताकि वे शिक्षा के माध्यम से रोजगार और व्यवसाय प्राप्त कर गरीबी दूर कर सकें। प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई।

हरिभाऊ बागडे मंगलवार को गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा के षष्ठ दीक्षांत समारोह में माही डेम रोड बड़वी स्थित माही भवन परिसर में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि डिग्री प्राप्त करने वाले युवाओं का दायित्व है कि वे अपने गांव के स्कूलों में हो रही पढ़ाई पर ध्यान दें और अपनी विद्या दूसरों को भी देने का प्रयास करें। शिक्षा बौद्धिक क्षमता को विकसित करती है और समस्या समाधान का मार्ग प्रदान करती है। नई शिक्षा नीति का उद्देश्य भी यही है।

उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 2014 में विश्व में 11वें स्थान पर थी, जो अब चौथे स्थान पर पहुंच गई है। देश में 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाया गया है। उन्होंने मां त्रिपुरा सुंदरी के दर्शन कर यह कामना की कि यहां के बच्चों की बौद्धिक क्षमता बढ़े, शिक्षक खुलकर विद्या प्रदान करें और सभी को अच्छा स्वास्थ्य मिले। इस अवसर पर उन्होंने बांसिया भील, राणा पूंजा, राजा डूंगरिया और कालीबाई को भी याद किया।

समारोह में 22 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि और 34 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए गए। राज्यपाल ने कौटिल्य शोध भवन और स्वामी विवेकानंद छात्र कल्याण भवन का लोकार्पण तथा संकाय भवन का शिलान्यास किया। समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. केशव सिंह ठाकुर ने की और स्वागत उद्बोधन के साथ विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।

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