Rahul Gandhi ने दिल्ली दंगों की याद दिलाई: केजरीवाल पर तीखा हमला
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के मद्देनजर कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने पटपड़गंज सीट पर एक जनसभा को संबोधित किया, जहां उन्होंने अरविंद केजरीवाल और दिल्ली दंगों को लेकर तीखे आरोप लगाए। Rahul Gandhi ने इस मौके पर दिल्ली के मुसलमानों को दंगों की याद दिलाई और केजरीवाल की चुप्पी पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब दिल्ली में हिंसा हो रही थी, तब मुख्यमंत्री केजरीवाल कहीं नजर नहीं आए। इस बयान से Rahul Gandhi ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधा और दिल्ली में कांग्रेस को मुस्लिम वोट बैंक को पुनः हासिल करने का मौका देने की कोशिश की।
दिल्ली दंगों की याद दिलाकर मुसलमानों को साधने की कोशिश
Rahul Gandhi ने दिल्ली दंगों का जिक्र करते हुए इस बात की ओर इशारा किया कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में जो सांप्रदायिक हिंसा हुई, उसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कोई ठोस नेतृत्व नहीं था। फरवरी 2020 में दिल्ली के पूर्वोत्तर हिस्से में भड़की इस हिंसा में कम से कम 53 लोग मारे गए थे, और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। Rahul Gandhi ने आरोप लगाया कि उस समय केजरीवाल न तो दंगे को रोकने में सक्रिय दिखे और न ही हिंसा के बाद किसी प्रकार की सांत्वना देने के लिए सामने आए।
Rahul Gandhi का यह बयान सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी की कोशिशों को रेखांकित करता है, जो इस बार दिल्ली विधानसभा चुनावों में मुस्लिम वोट बैंक को अपनी ओर खींचने के लिए कर रही है। पिछले दो चुनावों में मुस्लिम वोट आम आदमी पार्टी (AAP) के पक्ष में गया था, और अब कांग्रेस इसे फिर से अपनी ओर मोड़ने के लिए प्रयासरत है। Rahul Gandhi ने जनसभा में इस बात को प्रमुखता से उठाया कि वह दिल्ली के मुसलमानों की स्थिति को लेकर संवेदनशील हैं और उनकी आवाज़ को सत्ता में लेकर आएंगे।
आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच मुकाबला
दिल्ली विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का मुख्य मुकाबला आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी से है। हालांकि, कांग्रेस पिछले कुछ सालों से चुनावी मैदान में अपनी पुरानी ताकत को खो चुकी है, लेकिन इस बार पार्टी ने दिल्ली के मुसलमानों को अपनी ओर आकर्षित करने की योजना बनाई है। Rahul Gandhi ने दिल्ली दंगों का मुद्दा उठाकर उस मुस्लिम वोट बैंक को पुनः कांग्रेस की ओर खींचने की कोशिश की है, जो पिछले चुनावों में AAP के पक्ष में गया था।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, Rahul Gandhi की यह रणनीति भाजपा और AAP दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। जहां एक तरफ भाजपा दंगों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस और AAP को घेरने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ AAP को मुस्लिम समुदाय की चिंता और अपने कामकाज के कारण विश्वास में लाने के लिए कांग्रेस अपनी पूरी ताकत झोंक रही है।
दिल्ली दंगे और केजरीवाल पर राहुल का हमला
Rahul Gandhi का यह हमला इस बात पर केंद्रित था कि मुख्यमंत्री केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली में हालात बिगड़े थे और बाद में उनकी चुप्पी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। दिल्ली में हुई हिंसा पर राहुल गांधी ने कहा, “जब दिल्ली में लोग मर रहे थे, तब केजरीवाल अपनी चुप्पी नहीं तोड़ पाए। हिंसा के दौरान जब दिल्ली को सबसे अधिक नेतृत्व की आवश्यकता थी, तब मुख्यमंत्री कहीं नजर नहीं आए।”
Rahul Gandhi का आरोप यह था कि केजरीवाल ने इस कठिन समय में संवेदनशीलता नहीं दिखाई, जिससे उनका नेतृत्व सवालों के घेरे में आ गया। उन्होंने इस चुप्पी को न केवल दिल्ली के लोगों के प्रति असंवेदनशीलता के रूप में प्रस्तुत किया, बल्कि यह भी कहा कि यह केजरीवाल के असली नेतृत्व की परख का समय था, जो उन्होंने गलत तरीके से नष्ट किया।
कांग्रेस की चुनावी रणनीति
कांग्रेस के लिए दिल्ली विधानसभा चुनाव एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है। पार्टी ने पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में अपनी स्थिति को कमजोर होते हुए देखा है, और अब राहुल गांधी ने मुस्लिम वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित करने की पूरी कोशिश की है। दिल्ली में मुसलमानों के बीच कांग्रेस का बड़ा आधार रहा है, और पार्टी इस बार उस समर्थन को फिर से हासिल करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।
Rahul Gandhi का यह बयान सीधे तौर पर यह दिखाता है कि कांग्रेस इस बार मुस्लिम समुदाय को साधने के लिए दंगों और उनकी पीड़ा का सहारा ले रही है। पार्टी का उद्देश्य यह है कि वह उन लोगों को यह विश्वास दिला सके कि केवल कांग्रेस ही उनके अधिकारों और सुरक्षा की रक्षा कर सकती है।
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