सिरोही: राजस्थान के सिरोही जिले की पिंडवाड़ा तहसील में प्रस्तावित चूना पत्थर खनन परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। इस परियोजना के तहत मैसर्स कमलेश मेटा कास्ट प्रा. लि. को करीब 800 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की अनुमति प्रस्तावित है, जो वाटेरा, रोहिड़ा, भारजा, तरुंगी, डोलीफली, पिपेला और खाराडोली जैसे कई गांवों को प्रभावित करेगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने पर्यावरणीय जनसुनवाई की सूचना को छिपाया और गुप्त तरीके से पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि निजी कंपनी को फायदा पहुंचाया जा सके। लोगों का मानना है कि यह परियोजना पर्यावरणीय असंतुलन, खेतों की बंजरता, मकानों को ब्लास्टिंग से नुकसान, धूल-प्रदूषण से स्वास्थ्य समस्याएं, जल संकट, और वन्यजीवों के अस्तित्व पर खतरा पैदा कर सकती है।
स्थानीय समुदाय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि वे इस खनन परियोजना को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह न सिर्फ उनके जीवन और आजीविका, बल्कि आसपास के पर्यावरण के लिए भी घातक साबित हो सकती है। शुक्रवार को भीमाना गांव में होने वाली जनसुनवाई में ग्रामीणों ने सैकड़ों की संख्या में एकजुट होकर सामूहिक आपत्ति दर्ज कराने की तैयारी कर ली है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह लड़ाई केवल जमीन की नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों की रक्षा से जुड़ी हुई है।