राजस्थान में CJP प्रदर्शन से पहले पुलिस की कार्रवाई तेज होने की खबरें सामने आई हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले अलवर, जयपुर, झुंझुनूं और सीकर में अलग-अलग घटनाक्रम सामने आए हैं। अलवर में NSUI कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर पुतला जलाकर प्रदर्शन किया, जिसके बाद विनोद जाटव और अंकित गुर्जर समेत कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। वहीं, झुंझुनूं के कम्युनिस्ट पार्टी नेता महिपाल पूनिया समेत पांच युवकों को दिल्ली पुलिस द्वारा डिटेन किए जाने की जानकारी है।
राजस्थान में CJP प्रदर्शन को लेकर जयपुर में भी कार्रवाई की खबर है, जहां 24 प्रदर्शनकारियों को पाबंद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा, सीकर जिले के रींगस में वकील सुरेंद्र उर्फ संजू वर्मा को डिटेन किए जाने की बात कही गई है। इस बीच, दिल्ली की ओर जाने वाली कुछ ट्रेनों के रद्द और रीशेड्यूल होने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, ट्रेनों में हुए बदलाव और प्रस्तावित प्रदर्शन के बीच सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
इन घटनाओं के बाद राजस्थान में पुलिस की कार्रवाई, प्रदर्शनकारियों की आवाजाही और विरोध-प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। आइए जानते हैं अलवर से लेकर दिल्ली तक इस पूरे घटनाक्रम में अब तक क्या-क्या सामने आया है।
राजस्थान में CJP प्रदर्शन से पहले अलवर में NSUI का विरोध

अलवर के नंगली सर्किल पर NSUI कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में युवाओं को डिटेन किए जाने के विरोध में पुतला जलाकर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए।
प्रदर्शन के दौरान NSUI नेता विनोद जाटव और अंकित गुर्जर समेत कई कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज करा रहे थे। NSUI ने आगे भी विरोध जारी रखने और जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।
दिल्ली में महिपाल पूनिया समेत पांच युवक डिटेन
दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे झुंझुनूं के कम्युनिस्ट पार्टी नेता महिपाल पूनिया समेत पांच युवकों को दिल्ली पुलिस द्वारा डिटेन किए जाने की जानकारी सामने आई है। महिपाल पूनिया के मुताबिक, उन्हें जंतर-मंतर जाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने दावा किया कि पुलिस उन्हें बस में बैठाकर अलग-अलग जगहों पर ले जा रही थी। इस कार्रवाई पर दिल्ली पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।
जयपुर में 24 प्रदर्शनकारी पाबंद, रींगस में वकील डिटेन
राजस्थान में CJP प्रदर्शन से पहले जयपुर में शुक्रवार रात 24 प्रदर्शनकारियों को पाबंद किए जाने की जानकारी मिली है। वहीं, सीकर जिले के रींगस में वकील सुरेंद्र उर्फ संजू वर्मा को भी डिटेन किए जाने की खबर है। इन कार्रवाइयों के विस्तृत कारण और संबंधित पुलिस अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
राजस्थान से दिल्ली जाने वाली ट्रेनों पर असर?
प्रस्तावित प्रदर्शन के बीच राजस्थान से जुड़ी 12 ट्रेनों के रद्द होने और दो ट्रेनों को पांच-पांच घंटे के लिए रीशेड्यूल किए जाने की जानकारी सामने आई है। अलवर रेलवे जंक्शन पर भी यात्रियों की संख्या कम होने की बात कही गई है। हालांकि, सभी ट्रेनें रद्द या रीशेड्यूल होने का कारण CJP प्रदर्शन ही था, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। यात्रियों को अपनी ट्रेन की स्थिति रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट या NTES पर जांचनी चाहिए।
राकेश गुर्जर की कथित धमकी से भी विवाद
जयपुर के शहीद स्मारक पर CJP के संस्थापक को थप्पड़ मारे जाने की घटना के बाद राकेश गुर्जर का नाम भी चर्चा में आया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उन्होंने अभिजीत दीपके, ध्रुव राठी और उनके साथियों को दिल्ली में पीटने की धमकी दी। इसके साथ ही ऐसा करने वाले व्यक्ति को 50 हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा किए जाने का दावा भी सामने आया है। हालांकि, कथित धमकी की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस की कार्रवाई के बारे में आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
राजस्थान में CJP प्रदर्शन को लेकर आगे क्या होगा?
राजस्थान में CJP प्रदर्शन से पहले अलवर में NSUI का विरोध, झुंझुनूं के नेता महिपाल पूनिया समेत पांच युवकों का दिल्ली में डिटेन होना, जयपुर में 24 प्रदर्शनकारियों को पाबंद किए जाने और रींगस में वकील को डिटेन किए जाने की खबरें सामने आई हैं। ट्रेनों के संचालन में बदलाव और कथित धमकी ने भी इस घटनाक्रम को चर्चा में ला दिया है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर प्रशासन क्या कदम उठाता है, हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में क्या जानकारी सामने आती है और विरोध-प्रदर्शन को लेकर संबंधित संगठनों का अगला कदम क्या होता है। पुलिस और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान सामने आने के बाद पूरे मामले की तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।