सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: Delhi-Noida डीएनडी फ्लाईवे पर टोल वसूली पर रोक
Delhi-Noida को जोड़ने वाले डीएनडी फ्लाईवे पर टोल वसूली को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 2016 के फैसले को सही ठहराया, जिसमें डीएनडी फ्लाईवे को टोल फ्री कर दिया गया था। कोर्ट ने इस मामले में नोएडा टोल ब्रिज कंपनी के साथ किए गए एग्रीमेंट को खारिज किया, जिसमें कंपनी को अनिश्चितकाल तक टोल वसूली का अधिकार मिल रहा था।
हाईकोर्ट के फैसले का समर्थन
Delhi-Noida: 2016 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा था कि नोएडा टोल ब्रिज कंपनी ने निर्धारित राशि पहले ही कमा ली है और इसलिए टोल वसूली को रोक दिया गया। इस निर्णय के खिलाफ कंपनी सुप्रीम कोर्ट गई थी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट ने यह भी माना कि नोएडा ऑथोरिटी द्वारा टोल कंपनी को बिना सार्वजनिक टेंडर जारी किए ठेका दिया गया था, जो कि गलत और मनमाना था।
सुप्रीम कोर्ट का तर्क
Delhi-Noida: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि नागरिकों को इस तरह की याचिका दायर करने का अधिकार था। फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशंस ने जनहित में यह याचिका दायर की थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि नोएडा ऑथोरिटी ने टोल ब्रिज कंपनी के साथ ऐसा अनुबंध किया था, जिससे कंपनी को अनंतकाल तक टोल वसूलने का अधिकार मिल गया। इसके चलते आम नागरिकों से कई सौ करोड़ रुपए की धोखाधड़ी से वसूली की गई।
टोल वसूली पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
Delhi-Noida: सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 2001 में डीएनडी रोड के चालू होने के बाद से 2016 तक टोल कंपनी ने काफी मुनाफा कमाया है। अब, इसे फिर से टोल वसूलने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि कंपनी को रोड का रखरखाव जारी रखने का अधिकार रहेगा।
विज्ञापन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की चुप्पी
Delhi-Noida: सुप्रीम कोर्ट ने डीएनडी फ्लाईवे पर विज्ञापन लगाने को लेकर नोएडा ऑथोरिटी और टोल ब्रिज कंपनी के बीच चल रहे विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं की। कोर्ट ने कहा कि यह विवाद कानूनी फोरम में हल किया जाए।
पूर्वी कोर्ट की खिंचाई
Delhi-Noida: इससे पहले, 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने डीएनडी टोल ब्रिज कंपनी की खिंचाई करते हुए कहा था कि वे बार-बार इसे देश का सर्वश्रेष्ठ हाइवे बता रहे थे, जबकि यह केवल 10 किलोमीटर लंबी सड़क है। चीफ जस्टिस ने यह भी कहा था कि अगर टोल वसूली की अनुमति दी जाती है और बाद में साबित होता है कि कंपनी गलत थी, तो क्या वह पैसे लौटाएगी?
एक लंबा और पेचीदा मामला
Delhi-Noida: यह मामला आठ सालों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित था, और अब जाकर अंतिम फैसला आया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कंपनी को अनावश्यक रूप से टोल वसूली का अधिकार नहीं दिया जा सकता, और यह निर्णय नागरिकों के हित में लिया गया है।
कंपनी के भविष्य पर असर
Delhi-Noida: अब यह स्पष्ट है कि नोएडा टोल ब्रिज कंपनी को टोल वसूली की अनुमति नहीं दी जाएगी, लेकिन इसके बाद भी कंपनी को रोड के रखरखाव की जिम्मेदारी दी गई है। यह निर्णय टोल वसूली से जुड़ी अन्य विवादों के लिए एक मिसाल बनेगा।
नागरिकों के हित में फैसला
Delhi-Noida: सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और यह सुनिश्चित करता है कि टोल वसूली के मामले में कोई भी मनमानी नहीं की जाएगी। इसके साथ ही, यह निर्णय शासन और प्रशासन की जिम्मेदारी की ओर भी इशारा करता है कि वे ऐसे मामलों में सख्त कदम उठाएं ताकि आम जनता को धोखाधड़ी का शिकार न होना पड़े।
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