5 महत्वपूर्ण फैसले जिनकी वजह से पूरा देश Manmohan Singh के सामने नतमस्तक रहेगा

By Editor
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Manmohan Singh

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. Manmohan Singh के 5 ऐतिहासिक फैसले

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. Manmohan Singh का 26 दिसंबर 2024 को दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया। उनकी राजनीतिक यात्रा ने भारत के आर्थिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 2004 से 2014 तक प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी निभाने वाले डॉ. Manmohan Singh ने कई ऐतिहासिक फैसले लिए, जो आज भी देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालते हैं। आइए जानते हैं उन पांच महत्वपूर्ण फैसलों के बारे में, जिनकी वजह से डॉ. Manmohan Singh भारतीय राजनीति में एक मजबूत छवि छोड़ गए।

1. राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NAREGA)

2005 में Manmohan Singh की सरकार ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NAREGA) लागू किया। यह योजना बाद में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के नाम से जानी गई। इस योजना का मुख्य उद्देश्य भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की स्थिति को सुधारना था। इसके तहत हर ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन का रोजगार देने का प्रावधान था।

Manmohan Singh के इस निर्णय ने देश के लाखों गरीब और बेरोजगार ग्रामीणों को रोजगार के अवसर प्रदान किए और गरीबी उन्मूलन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया। इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक और आर्थिक स्थिति को सुधारने की दिशा में भी काम हुआ।

2. सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI)

2005 में Manmohan Singh की सरकार ने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) पारित किया। यह एक ऐतिहासिक कदम था, क्योंकि इसके माध्यम से नागरिकों को सरकारी प्राधिकरणों से सूचना प्राप्त करने का अधिकार मिला। इस एक्ट के लागू होने के बाद सरकारी कामकाजी पारदर्शिता बढ़ी, जिससे न केवल सरकार की जवाबदेही बढ़ी, बल्कि भ्रष्टाचार को भी नियंत्रित करने में मदद मिली।

Manmohan Singh का यह फैसला लोकतंत्र को सशक्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण था। इस कानून ने भारतीय नागरिकों को उनकी सरकार के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल करने का अधिकार दिया, जिससे लोगों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में जागरूक किया गया।

3. आधार की सुविधा

प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. Manmohan Singh ने आधार कार्ड की शुरुआत की थी। 2009 में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का गठन किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत के नागरिकों के लिए एक अद्वितीय पहचान प्रणाली स्थापित करना था।

आधार ने भारतीय नागरिकों को एक ऐसा पहचान पत्र प्रदान किया, जिसे देश के विभिन्न हिस्सों में इस्तेमाल किया जा सकता था। इसके माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ सीधा उन तक पहुँचाने की व्यवस्था की गई, जिससे भ्रष्टाचार पर काबू पाया जा सका। आधार ने सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के लिए एक पारदर्शी और सरल प्रणाली तैयार की, जो अब लाखों भारतीयों के जीवन में एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

4. भारत-अमेरिका परमाणु सौदा

डॉ. Manmohan Singh के प्रधानमंत्री रहते हुए भारत और अमेरिका के बीच असैन्य परमाणु समझौता (India-US Civil Nuclear Agreement) हुआ। यह समझौता भारत के परमाणु कार्यक्रम को वैश्विक मान्यता दिलाने में एक मील का पत्थर साबित हुआ। इस समझौते के बाद भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (NSG) से छूट प्राप्त हुई, जो एक ऐतिहासिक कूटनीतिक सफलता थी।

इस सौदे के परिणामस्वरूप भारत को परमाणु उर्जा के लिए यूरेनियम आयात करने का अधिकार मिला, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को एक नया आयाम मिला। साथ ही, इस समझौते ने भारत के वैश्विक कूटनीतिक संबंधों को भी मजबूत किया। यह फैसला डॉ. मनमोहन सिंह की कूटनीतिक दृष्टि और वैश्विक प्रभाव को साबित करने वाला था।

5. प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer)

डॉ. Manmohan Singh ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) प्रणाली की शुरुआत की। यह प्रणाली सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी और सहायता को सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी योजनाओं के लाभ को सीधे और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुँचाना था।

इस योजना के माध्यम से, कई सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार और मध्यस्थों की भूमिका को कम किया गया। इसके अलावा, DBT ने भारतीयों को सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में आसानी प्रदान की और ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक खाता खोलने की प्रवृत्ति को भी बढ़ावा दिया।

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