रिपोर्ट में सरकार से Smart Manufacturing को बढ़ावा देने की अपील

By Editor
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Smart Manufacturing को बढ़ावा देने के लिए सरकार से प्रौद्योगिकी सहयोग की सिफारिश: सीआईआई रिपोर्ट

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने अपनी रिपोर्ट में Smart Manufacturing को बढ़ावा देने के लिए सरकार से ठोस कदम उठाने की सिफारिश की है। रिपोर्ट का शीर्षक ‘Smart Manufacturing: भारत की संभावनाओं को खोलना’ है, जो इस बात पर केंद्रित है कि कैसे अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियां जैसे इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल), रोबोटिक्स और ऑटोमेशन भारतीय विनिर्माण परिदृश्य को नए आयाम दे सकती हैं।

सीआईआई ने इन तकनीकों को अपनाने में आ रही चुनौतियों को दूर करने के लिए साझा प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित करने, प्रौद्योगिकी के लिए बजट आवंटन बढ़ाने, और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने की सिफारिश की है। इसके अलावा, Smart Manufacturing को व्यापक रूप से अपनाने के लिए सहायक नीतियों के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी को बढ़ावा देने का आग्रह किया है।

सीआईआई की रिपोर्ट: भारत में Smart Manufacturing की संभावनाएं

सीआईआई ने अपनी रिपोर्ट के दूसरे भाग में भारत के Manufacturing क्षेत्र पर स्मार्ट प्रौद्योगिकियों के प्रभाव को गहराई से विश्लेषित किया है। रिपोर्ट में यह कहा गया है कि उच्च-पूंजी उद्योग जैसे सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस और ऑटोमोटिव इन तकनीकों को अपनाने में अग्रणी हैं, जबकि पारंपरिक क्षेत्रों जैसे कपड़ा और खाद्य प्रसंस्करण में धीमी गति से डिजिटलीकरण हो रहा है। सीआईआई का यह अध्ययन भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए स्मार्ट प्रौद्योगिकियों के महत्व को उजागर करता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगले कुछ वर्षों में अधिक निवेश की उम्मीद है। हालांकि, अभी भी कई कंपनियां अपने बजट का सिर्फ 10 प्रतिशत ही प्रौद्योगिकी पर खर्च कर रही हैं। यह आंकड़ा आगामी वर्षों में 11-15 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान है, खासकर आईओटी, रोबोटिक्स और बिग डेटा में।

बाधाओं का सामना कर रहे छोटे और मध्यम उद्यम (एसएमई)

सीआईआई ने अपनी रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया है कि छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) के लिए इन स्मार्ट प्रौद्योगिकियों को अपनाने में कई बाधाएं हैं। उच्च लागत, अस्पष्ट निवेश पर रिटर्न और पुराने प्रणालियों के एकीकरण की चुनौतियाँ प्रमुख समस्याएं हैं। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एक उच्च गुणवत्ता वाला कार्यबल तैयार करना और कौशल अंतराल को पाटने के लिए भी तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि ये कंपनियां तकनीकी परिवर्तन में भाग ले सकें।

समाधान के तौर पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी का महत्व

सीआईआई ने इन बाधाओं को दूर करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) को बढ़ावा देने की सिफारिश की है। इसके तहत, सरकार को प्रौद्योगिकी के लिए बजट आवंटन बढ़ाने, साझा प्रौद्योगिकी केंद्र स्थापित करने और उद्योग-अकादमिक सहयोग को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त, स्मार्ट विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत समर्थन भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

नवीन प्रौद्योगिकियों के साथ भारत को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में अग्रसर करना

सीआईआई के Manufacturing उत्कृष्टता परिषद के अध्यक्ष और जेसीबी इंडिया लिमिटेड के सीईओ, दीपक शेट्टी ने इस रिपोर्ट को एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर विनिर्माण क्षेत्र में नेतृत्व करने की दिशा में अग्रसर हो सकता है। उन्होंने कहा, “भारत का विनिर्माण क्षेत्र एक महत्वपूर्ण परिवर्तन से गुजर रहा है, जो नए और उन्नत प्रौद्योगिकियों के तेजी से अपनाने से प्रेरित है। इन तकनीकों को अपनाकर, भारत वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल कर सकता है।”

भारत के विनिर्माण क्षेत्र में परिवर्तन की आवश्यकता

सीआईआई ने अपने अध्ययन में यह भी बताया है कि भारत के Manufacturing क्षेत्र को प्रतिस्पर्धात्मक बनाने के लिए, औद्योगिक प्रक्रियाओं में प्रौद्योगिकी का उपयोग और औद्योगिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने की जरूरत है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्मार्ट प्रौद्योगिकियों जैसे स्मार्ट फैक्ट्री और ऑटोमेशन का उपयोग से आपूर्ति श्रृंखला में दृश्यता और क्षमता बढ़ाई जा सकती है, जिससे समग्र उत्पादकता और दक्षता में सुधार होगा।

कौशल अंतराल और प्रौद्योगिकी अवसंरचना की आवश्यकता

रिपोर्ट में कौशल अंतराल को पाटने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया है। Manufacturing क्षेत्र में कार्यबल को उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने में सक्षम बनाने के लिए बेहतर प्रशिक्षण की आवश्यकता है। इसके अलावा, प्रौद्योगिकी अवसंरचना में निवेश और इसे छोटे और मझौले उद्योगों तक पहुंचाना भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि इन उद्योगों को डिजिटल रूप से सशक्त किया जा सके और वे स्मार्ट विनिर्माण प्रक्रिया में शामिल हो सकें।

सीआईआई का लक्ष्य: भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना

सीआईआई ने इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया है कि उनका लक्ष्य भारत को एक विश्वसनीय और प्रतिस्पर्धी वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए सीआईआई सरकार के साथ मिलकर कार्य कर रहा है ताकि प्रौद्योगिकी अपनाने में आने वाली बाधाओं को दूर किया जा सके, और विनिर्माण क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन को बढ़ावा दिया जा सके।

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