One Nation-One Election बिल: सरकार की दो चरणों में चुनाव कराने की योजना, विपक्ष के विरोध की तैयारी
केंद्र सरकार ‘One Nation-One Election‘ बिल को अमली जामा पहनाने की पूरी तैयारी कर चुकी है। लंबे समय से चर्चा में रहे इस कानून को मंगलवार, 17 दिसंबर को लोकसभा में पेश किया जाएगा। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल इसे दोपहर करीब 12 बजे सदन में पेश करेंगे। इस बिल के जरिए भारत में लोकसभा, विधानसभा, नगर पालिकाओं और पंचायत चुनाव एक साथ कराने का प्रावधान है। सरकार का मानना है कि इससे समय और संसाधनों की बड़ी बचत होगी, जबकि विपक्ष इसे संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ बताकर विरोध करने की योजना बना चुका है।
दो चरणों में लागू होगी ‘One Nation-One Election‘ योजना
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित कानून को दो चरणों में लागू किया जाएगा।
- पहले चरण में लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाएंगे।
- दूसरे चरण में इन चुनावों के 100 दिनों के भीतर नगर पालिकाओं और पंचायतों के चुनाव संपन्न कराए जाएंगे।
इस क्रम में केंद्र सरकार ने विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी कर सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
कैबिनेट की मंजूरी और उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट
बीते गुरुवार को मोदी सरकार ने केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में ‘One Nation-One Election‘ से जुड़े इस विधेयक को मंजूरी दी थी। इससे पहले सितंबर 2023 में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति ने चुनावों के एकसाथ आयोजन को लेकर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत की थीं।
समिति की रिपोर्ट में बताया गया कि बार-बार चुनाव कराने से न केवल देश की आर्थिक व्यवस्था पर दबाव पड़ता है, बल्कि सरकारी नीतियों के क्रियान्वयन में भी बाधाएं उत्पन्न होती हैं। इसको लेकर प्रस्तावित कानून में समस्त राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चुनाव एक निश्चित समयसीमा के तहत आयोजित कराने की योजना है।
विपक्ष का विरोध और संभावित हंगामा
हालांकि, ‘One Nation-One Election‘ बिल को लेकर विपक्ष पहले से ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है। विपक्षी पार्टियां इस बिल को संविधान के संघीय ढांचे के खिलाफ मानती हैं। उनके अनुसार, इस कानून से राज्यों के अधिकारों में कटौती होगी और यह लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करेगा।
सूत्रों की मानें तो विपक्ष मंगलवार को लोकसभा में भारी हंगामा करने की योजना बना रहा है। विपक्षी दलों का तर्क है कि राज्यों और केंद्र के चुनावों को एकसाथ कराने से क्षेत्रीय मुद्दे गौण हो जाएंगे और इसका लाभ सत्ताधारी पार्टी को मिलेगा।
सरकार की रणनीति और घटक दलों का समर्थन
वहीं, सरकार ने बिल के खिलाफ संभावित विरोध को देखते हुए अपनी रणनीति तैयार कर ली है। एनडीए (NDA) के घटक दलों ने इस बिल का समर्थन किया है, जिससे सरकार के लिए इसे पारित कराना आसान हो सकता है। यदि बिल में मौजूद प्रावधानों को लेकर कोई आपत्ति सामने आती है, तो इसे संसदीय समिति के पास भेजे जाने का विकल्प भी सरकार के पास मौजूद है।
बीजेपी का मानना है कि ‘One Nation-One Election‘ से चुनावों में होने वाले भारी खर्च पर नियंत्रण लगाया जा सकेगा। इसके अलावा, बार-बार चुनाव कराने से सरकारी कामकाज में जो रुकावटें आती हैं, उन्हें भी दूर किया जा सकेगा।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ से संभावित फायदे
- वित्तीय बचत: एकसाथ चुनाव कराने से चुनावी खर्च में बड़ी कटौती होगी।
- प्रशासनिक सुविधा: चुनावों के दौरान प्रशासन पर पड़ने वाला अतिरिक्त बोझ कम होगा।
- सरकारी नीतियों का क्रियान्वयन: बार-बार आचार संहिता लागू होने से जो नीतिगत कार्य बाधित होते हैं, उन्हें गति मिलेगी।
- जनता की भागीदारी: एक ही समय में चुनाव होने से मतदाता अधिक संख्या में मतदान कर सकेंगे।
विपक्ष के सवाल और सरकार का जवाब
विपक्ष का मुख्य तर्क यह है कि ‘One Nation-One Election‘ भारतीय लोकतंत्र की विविधता के खिलाफ है। भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में क्षेत्रीय मुद्दे अलग-अलग राज्यों में चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं। ऐसे में एकसाथ चुनाव कराने से राष्ट्रीय मुद्दों की छाया में क्षेत्रीय समस्याएं दब जाएंगी।
सरकार इस तर्क का जवाब देते हुए कहती है कि यह योजना देशहित में है और इससे देश के विकास को गति मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी कई मंचों पर एक देश-एक चुनाव की वकालत कर चुके हैं। उनका मानना है कि चुनावों के बार-बार आयोजन से आर्थिक और प्रशासनिक नुकसान होता है, जिसे ‘One Nation-One Election‘ के जरिए दूर किया जा सकता है।