किसानों का Delhi कूच जारी, पंधेर का आरोप- सरकार ने नहीं दिया न्योता; हरियाणा में रोका गया

By Editor
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Delhi

पंजाब के किसान 13 मांगों को लेकर आज फिर Delhi कूच करेंगे, हरियाणा पुलिस ने रोका

पंजाब के किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) समेत 13 प्रमुख मांगों को लेकर आज फिर Delhi कूच करेंगे। किसान मजदूर मोर्चा के कोऑर्डिनेटर सरवन सिंह पंधेर ने बताया कि आज दोपहर 12 बजे 101 किसानों का जत्था Delhi के लिए रवाना होगा। यह किसान सरकार से अपनी लंबित मांगों पर बात करने के लिए Delhi पहुंचेगा, लेकिन उनके रास्ते में पहले ही कई रोड़े अटका दिए गए हैं।

सरकार से बातचीत का कोई न्योता नहीं

पंधेर का आरोप है कि 7 दिसंबर को उन्होंने सरकार से बातचीत के लिए समय मांगा था, लेकिन सरकार की तरफ से कोई न्योता नहीं आया। ऐसे में किसानों ने अब Delhi कूच करने का फैसला लिया है। उनका कहना है कि अगर सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी तो उनका आंदोलन और तेज होगा।

इससे पहले 6 दिसंबर को भी किसानों ने Delhi कूच करने की कोशिश की थी, लेकिन हरियाणा पुलिस ने उन्हें शंभू बॉर्डर पर रोक लिया था। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे, जिससे 8 किसान घायल हो गए। इसके बाद पंधेर ने किसानों को वापस बुला लिया था और केंद्र सरकार को एक आखिरी मौका दिया था कि वे 8 दिसंबर तक उनसे बातचीत करें।

हरियाणा पुलिस ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की

किसानों के Delhi कूच से पहले, हरियाणा पुलिस ने मीडिया कर्मियों के लिए एक नोटिस जारी किया है, जिसमें उन्हें शंभू बॉर्डर या अन्य स्थानों से कम से कम 1 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी गई है। पुलिस ने मीडिया को भीड़ से उचित दूरी बनाए रखने के लिए कहा है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। इसके अलावा, पंजाब के DGP से भी अनुरोध किया गया है कि वे सुनिश्चित करें कि मीडिया कर्मियों को सीमा से बहुत दूर रोका जाए।

भारतीय किसान यूनियन का विरोध प्रदर्शन

भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां ने 6 दिसंबर को शंभू बॉर्डर पर पुलिस द्वारा आंसू गैस दागने के विरोध में प्रदर्शन किया। इसके साथ ही, पंजाब के 17 जिलों में यूनियन ने केंद्र और हरियाणा सरकार के पुतले जलाए। यूनियन के प्रमुख जोगिंदर सिंह उगराहां और महासचिव सुखदेव सिंह कोकरी ने कहा कि किसानों की मांगें जायज हैं और सरकार ने किसानों को अनसुना किया है। उगराहां और कोकरी ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के साथ धक्का कर रही है और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं कर रही है।

किसानों की प्रमुख मांगें

किसानों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कृषि कानूनों का रिव्यू, और किसानों के लिए बेहतर लाभकारी नीतियों का मसला शामिल है। इसके अलावा, कृषि उत्पादों पर न्यूनतम मूल्य सुनिश्चित करना और किसानों को सुरक्षित बिक्री की गारंटी जैसे मुद्दे भी उनकी मांगों में शामिल हैं। किसान अपनी बात सरकार से सीधे तौर पर करना चाहते हैं, और सरकार द्वारा उपेक्षा किए जाने के कारण उन्हें आंदोलन करने पर मजबूर होना पड़ा है।

किसानों का आक्रोश

Delhi: पंधेर और अन्य किसान नेताओं का कहना है कि सरकार की नीति किसानों के खिलाफ है और अगर सरकार किसानों की बातों का समाधान नहीं करती है तो आंदोलन और उग्र होगा। किसानों का आक्रोश इस बात से भी बढ़ा है कि केंद्र सरकार उनकी मांगों पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।

किसानों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों को न माना गया तो यह आंदोलन और भी ज्यादा तेज हो सकता है। साथ ही, किसान संगठन लोकसभा चुनावों के दौरान सरकार के खिलाफ आंदोलन को और मजबूती से आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।

हरियाणा पुलिस और किसानों के बीच टकराव

6 दिसंबर को हुए संघर्ष के बाद से हरियाणा पुलिस और किसानों के बीच टकराव बढ़ गया है। हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागने के बाद किसान नेताओं और मीडिया कर्मियों को आगे बढ़ने से रोका था। वहीं, किसानों ने हरियाणा पुलिस के इस कदम को किसानों के अधिकारों का उल्लंघन बताया और पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया।

मीडिया और स्थानीय प्रशासन की भूमिका

Delhi: मीडिया और स्थानीय प्रशासन के लिए समिट किए गए निर्देश भी इस आंदोलन के दौरान काफी महत्वपूर्ण हो गए हैं। मीडिया को भीड़ से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को टाला जा सके। किसानों ने मीडिया को पूरी तरह से समर्थन दिया है और आरोप लगाया है कि सरकार ने उनके आंदोलन को दबाने के लिए हर संभव प्रयास किया है।

किसानों की आगामी रणनीति

अगर सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं, तो किसान संगठनों ने भविष्य में बड़े आंदोलन की योजना बनाई है। आगामी रणनीतियों में जन जागरूकता कार्यक्रम और विभिन्न जिलों में प्रदर्शन शामिल हो सकते हैं, जिनके जरिए वे सरकार तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं।

किसानों का कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए लड़ाई जारी रखेंगे और उनकी आवाज को किसी भी हाल में दबाया नहीं जा सकेगा।

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