वक्‍फ बिल पर BJP की बड़ी जीत, JPC में सभी संशोधन पास

By Editor
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वक्फ बिल पर JPC में बीजेपी की बड़ी जीत, विपक्ष के सभी संशोधन खारिज

वक्फ बोर्ड संशोधन बिल 2024 पर चर्चा करते हुए सोमवार को हुई ज्वाइंट पार्लियामेंट कमेटी (JPC) की बैठक में बीजेपी और एनडीए के सभी संशोधन स्वीकार कर लिए गए। वहीं, विपक्ष द्वारा पेश किए गए सभी संशोधनों को ठुकरा दिया गया। इस बैठक के बाद, समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इन संशोधनों से वक्फ विधेयक को और अधिक प्रभावी और बेहतर बनाने का प्रयास किया गया है। वहीं, विपक्षी नेताओं ने इस प्रक्रिया की निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नष्ट करने का आरोप लगाया।

JPC की बैठक और संशोधन प्रक्रिया

JPC की बैठक में वक्फ बोर्ड संशोधन बिल 2024 के मसौदे पर चर्चा की गई, जिसमें 572 संशोधनों का सुझाव दिया गया था। इन संशोधनों में सरकार द्वारा पेश किए गए संशोधनों को मंजूरी मिल गई, जबकि विपक्ष द्वारा पेश किए गए सभी संशोधनों को वोटिंग के द्वारा खारिज कर दिया गया। ज्वाइंट पार्लियामेंट कमेटी की बैठक में प्रत्येक क्लॉज पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसके बाद वोटिंग की प्रक्रिया के जरिए निर्णय लिया गया।

JPC के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने कहा कि विधेयक को सुधारने और उसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए सरकार और एनडीए के सदस्यों द्वारा पेश किए गए संशोधनों को स्वीकार किया गया है। पाल ने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से लोकतांत्रिक थी और इसे बहुमत से मंजूरी मिली है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी पक्षों से चर्चा के बाद ही इन संशोधनों को स्वीकार किया गया है, जिससे विधेयक को एक मजबूत आधार मिला है।

विपक्ष की प्रतिक्रिया और आरोप

विपक्षी सांसदों ने JPC की बैठक के बाद इस फैसले की आलोचना की और इसे तानाशाही करार दिया। टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह एक हास्यास्पद प्रक्रिया थी, क्योंकि उनकी बातों को नहीं सुना गया। बनर्जी ने आरोप लगाया कि JPC की अध्यक्षता कर रहे जगदंबिका पाल ने तानाशाही तरीके से फैसले लिए हैं और विपक्ष को सुनने का कोई मौका नहीं दिया गया।

विपक्ष का कहना था कि JPC में उनके द्वारा पेश किए गए संशोधनों को बिना किसी उचित विचार के खारिज कर दिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। उनके मुताबिक, यह एक असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक प्रक्रिया थी, जो लोकतांत्रिक मानकों के खिलाफ थी।

हालांकि, जगदंबिका पाल ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से लोकतांत्रिक थी और हर सदस्य को अपने विचार रखने का पूरा मौका मिला था। उन्होंने यह भी कहा कि बहुमत से किए गए फैसले को ही मंजूरी मिली है, और यह फैसला सभी हितधारकों और राज्यों के साथ चर्चा के बाद लिया गया है।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की भूमिका

विपक्ष के आरोपों के बीच केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर एनडीए सांसदों के साथ बैठक की थी। बैठक में सभी सांसदों को एकजुट रहने की सलाह दी गई थी ताकि विधेयक को प्रभावी तरीके से पास कराया जा सके। रिजिजू की बैठक ने स्पष्ट कर दिया था कि पार्टी के भीतर कोई भी मतभेद नहीं है और सभी सदस्य इस मुद्दे पर एकजुट हैं।

केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान विपक्ष के किसी भी आरोप को नजरअंदाज करते हुए इसे पार्टी के सामूहिक प्रयास का परिणाम बताया। रिजिजू ने कहा कि वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को लेकर किसी भी प्रकार की गलतफहमी नहीं होनी चाहिए, और पूरी प्रक्रिया को विधिक रूप से पारदर्शी और प्रभावी बनाया गया है।

JPC की बैठक में की गई चर्चा

JPC की बैठक में विधेयक के विभिन्न खंडों पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके दौरान यह भी साफ किया गया कि इस विधेयक के माध्यम से वक्फ बोर्ड के कार्यों को अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा, सरकार के द्वारा किए गए संशोधनों के जरिए वक्फ संपत्तियों के प्रशासन को बेहतर बनाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी उद्देश्य था।

इस बैठक में विपक्ष के संशोधनों को खारिज किए जाने पर जहां विपक्षी दलों ने नाराजगी जाहिर की, वहीं सरकार और एनडीए के सदस्य इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हैं। ज्वाइंट पार्लियामेंट कमेटी के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने इस निर्णय को लोकतांत्रिक बताते हुए इसे प्रक्रिया की सफलता करार दिया।

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