अगर आप राष्ट्रीय राजमार्ग पर सफर के दौरान खराब सड़कों को कोसते हैं, तो यह खबर आपकी नाराज़गी और बढ़ा सकती है। राजस्थान देश का ऐसा राज्य बन गया है, जहां लोगों ने सबसे ज्यादा टोल टैक्स चुकाया है। बीते पांच वर्षों में राजस्थान के वाहन चालकों ने टोल कंपनियों को करीब 29,700 करोड़ रुपये अदा किए हैं। यह चौंकाने वाली जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने लोकसभा में दी है। यह आंकड़े राजस्थान के झुंझुनू से कांग्रेस सांसद बृजेंद्र ओला के सवाल के जवाब में सामने आए हैं।
सांसद ओला ने सरकार से तीन अहम सवाल पूछे
- राजस्थान में कितने टोल प्लाजा ऐसे हैं, जहां तय अवधि पूरी होने के बाद भी टोल वसूला जा रहा है?
- कितने टोल प्लाजा पर बुनियादी सुविधाएं और एंबुलेंस की व्यवस्था मौजूद है?
- जिन टोल प्लाजा की अवधि खत्म हो चुकी है, उन्हें कब बंद किया जाएगा?
सरकार का जवाब क्या है?
मंत्रालय के अनुसार, राजस्थान में नेशनल हाईवे की कुल 8,731 किलोमीटर सड़कें टोल के दायरे में आती हैं। जबकि पूरे देश में यह आंकड़ा 55,904 किलोमीटर है। यानी देश की कुल टोल सड़कों का करीब 15 प्रतिशत हिस्सा अकेले राजस्थान में है। राज्य में कुल 174 टोल प्लाजा हैं, जबकि देशभर में इनकी संख्या 1,144 है। राजस्थान में एक टोल से दूसरे टोल की औसत दूरी 50 किलोमीटर से ज्यादा है, जो राष्ट्रीय औसत के लगभग बराबर है। मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि टोल प्लाजा का निर्धारण भूमि उपलब्धता, ट्रैफिक दबाव, शहरी सीमाओं, सड़क सुरक्षा और सड़क की बनावट को ध्यान में रखकर किया जाता है।

नई टोल व्यवस्था की तैयारी
सरकार ने भविष्य में टोल वसूली को आसान बनाने के लिए मल्टी लेन फ्री फ्लो (MLFF) टोल सिस्टम शुरू करने की घोषणा की है। इस व्यवस्था में गाड़ियों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। कैमरा और FASTag तकनीक के जरिए टोल अपने आप कट जाएगा, जिससे जाम और समय की बर्बादी कम होगी।
सड़कें बदहाल, सुविधाएं नदारद
लेकिन सांसद बृजेंद्र ओला का आरोप है कि इतना भारी टोल वसूलने के बावजूद राजस्थान की टोल सड़कों की हालत बेहद खराब है। उनका कहना है कि जयपुर-दिल्ली और अजमेर तक के NH-48 से सबसे ज्यादा टोल वसूला गया, लेकिन सड़क आज भी अधूरी और जगह-जगह से टूटी हुई है। ओला ने याद दिलाया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने करीब आठ साल पहले इस हाईवे का निरीक्षण कर एक साल में काम पूरा होने का वादा किया था, जो आज तक अधूरा है। उन्होंने एक गंभीर उदाहरण देते हुए बताया कि उनके संसदीय क्षेत्र फतेहपुर में NH-52 पर हुए एक सड़क हादसे में सात लोगों की मौत हो गई, लेकिन घायलों को दो घंटे तक एंबुलेंस नहीं मिल सकी।
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