महाराष्ट्र में EVM को लेकर बढ़ी विवाद, महाविकास अघाड़ी के विधायकों ने शपथ लेने से किया इनकार

By Editor
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महाराष्ट्र में EVM पर विवाद: महाविकास अघाड़ी के विधायकों ने शपथ लेने से किया इनकार

EVM: महाराष्ट्र विधानसभा के तीन दिवसीय विशेष सत्र की शुरुआत 7 दिसंबर को हुई, लेकिन इस बार सत्र की शुरुआत कुछ खास विवादों के साथ हुई है। विशेष सत्र का आयोजन नए विधायकों के शपथ ग्रहण और स्पीकर के चुनाव के लिए किया गया था, लेकिन विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (MVA) के विधायकों ने शपथ लेने से इनकार कर दिया। उनका मुख्य आरोप EVM (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) की विश्वसनीयता पर था, जिसे लेकर उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त की है।

EVM पर संदेह: महाविकास अघाड़ी का विरोध

शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने 7 दिसंबर को मीडिया से बातचीत करते हुए साफ कहा कि महाविकास अघाड़ी के विधायक विधानसभा सत्र में शपथ नहीं लेंगे। उनका कहना था कि अगर यह जीत जनता का जनादेश होती तो लोग खुश होते और जश्न मनाते, लेकिन ऐसी कोई खुशी कहीं भी देखने को नहीं मिली। इस पर आदित्य ठाकरे ने EVM की विश्वसनीयता पर संदेह जताया और सवाल उठाया कि क्या यह परिणाम सही हैं। उन्होंने दावा किया कि जो परिणाम आए हैं, वह संदेहास्पद हैं, और महाविकास अघाड़ी के सभी विधायकों ने निर्णय लिया है कि वे जब तक EVM पर उठाए गए सवालों का समाधान नहीं होगा, तब तक शपथ नहीं लेंगे।

मीडिया से मुखातिब होते समय आदित्य ठाकरे के साथ एनसीपी (राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी) के नेता जितेंद्र अव्हाद और कांग्रेस नेता नाना पटोले भी मौजूद थे। इन नेताओं ने भी EVM पर उठाए गए सवालों का समर्थन किया और इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में एक गंभीर मुद्दा बताया।

महाविकास अघाड़ी की बैठक: EVM पर चर्चा

इस बीच, महाविकास अघाड़ी के नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक उद्धव ठाकरे के आवास मातोश्री पर होनी थी, जहां इस मामले में विपक्ष का पक्ष और अधिक स्पष्ट किया जाएगा। इस बैठक में EVM से संबंधित मुद्दे पर चर्चा की जाएगी, खासकर उन घटनाओं पर, जो मारकडवाडी गांव में घटीं। विपक्षी दलों का कहना है कि इस इलाके में जो चुनावी परिणाम आए, वह बहुत ही संदिग्ध हैं।

नाना पटोले, जो कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं, इस बैठक में शामिल हो गए थे। उन्होंने कहा कि EVM के परिणामों में गड़बड़ी की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। उनका मानना है कि चुनाव प्रक्रिया में जो कुछ भी हुआ, वह संदेहास्पद है और इस मामले में जांच की आवश्यकता है।

कांग्रेस और एनसीपी का बयान: चुनाव प्रक्रिया पर सवाल

कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार ने भी चुनाव परिणामों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव नतीजों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसा लगता है कि पूरी चुनावी प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ी हुई है। वडेट्टीवार के अनुसार, जनता नाखुश है और ऐसा लगता है कि कुछ गलत हुआ है, जो इस बार के चुनाव परिणामों से साफ नजर आता है।

एनसीपी के नेताओं ने भी यही बयान दिया और आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। उनका कहना था कि जब तक EVM की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हैं, तब तक विधायकों के शपथ ग्रहण पर यह विवाद बना रहेगा।

विधानसभा सत्र के पहले दिन की गतिविधियाँ

विधानसभा सत्र के पहले दिन प्रो-टेम स्पीकर कालीदास कोलाम्बकर ने नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलानी शुरू की। इस दौरान, राज्य के उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत कई अन्य विधायकों ने शपथ ली।

राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने सत्र से पहले बीजेपी नेता कालीदास कोलाम्बकर को प्रो-टेम स्पीकर के रूप में नियुक्त किया था, ताकि वे विधानसभा सत्र की शुरुआत कर सकें और नए विधायकों से शपथ ले सकें।

EVM विवाद का बढ़ता असर: महाविकास अघाड़ी का रुख

महाराष्ट्र में EVM को लेकर विवाद नया नहीं है, लेकिन हालिया घटनाओं ने इसे एक और गंभीर मोड़ दिया है। महाविकास अघाड़ी के विधायकों ने शपथ लेने से इनकार कर दिया है और पार्टी के नेता यह स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक इस मामले में उचित समाधान नहीं निकाला जाएगा, तब तक वे विधानसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे।

इस मामले ने न केवल महाराष्ट्र, बल्कि पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया और EVM के उपयोग पर बहस छेड़ दी है। विपक्षी दलों का कहना है कि EVM के इस्तेमाल से चुनावी पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं और इस पर एक स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है।

क्या होगा आगे?

पार्टी के भीतर महाविकास अघाड़ी का यह रुख सत्ता पक्ष के लिए परेशानी का कारण बन सकता है, क्योंकि यह महाराष्ट्र विधानसभा की कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है। अगर विपक्षी दल शपथ ग्रहण समारोह में हिस्सा नहीं लेते हैं, तो यह विधायकों के अधिकारों के उल्लंघन के रूप में देखा जा सकता है।

इसके अतिरिक्त, यह विवाद विधानसभा की कार्यवाही और स्पीकर चुनाव के दौरान भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है। अगर महाविकास अघाड़ी के विधायकों का विरोध जारी रहता है, तो राज्य में राजनीतिक गतिरोध पैदा हो सकता है।

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