US Navy ने गलती से मार गिराया 484 करोड़ का F/A-18 फाइटर जेट, भारत ने राफेल-एम को चुना
अमेरिकी नौसेना (US Navy) ने हाल ही में लाल सागर में अपने F/A-18 फाइटर जेट को गलती से मार गिराया, जिससे उसे 473 से 484 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है। यह घटना तब हुई जब अमेरिकी नौसेना ने अपने अत्याधुनिक F/A-18 जेट को एक प्रशिक्षण मिशन के दौरान खो दिया। अमेरिकी नौसेना की इस गलती ने एक महत्वपूर्ण विमानों के नुकसान के रूप में इतिहास दर्ज किया, क्योंकि यह एक अत्यधिक मूल्यवान विमान था जिसकी कीमत उसके विभिन्न वैरिएंट्स के आधार पर तय की जाती है।
इस दुर्घटना के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि भारत ने क्यों राफेल-एम को चुना था और क्यों अमेरिकी F/A-18 जेट को नकारा। यह समझना जरूरी है कि भारतीय नौसेना ने अपने एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत के लिए अमेरिकी F/A-18 को एक विकल्प के रूप में चुना था, लेकिन बाद में फ्रांस के राफेल-एम को प्राथमिकता दी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी नौसेना के इस जेट के नुकसान के बाद दोनों विमानों की तुलना में क्या अंतर है, और क्यों भारत ने राफेल को चुना।
F/A-18 फाइटर जेट की ताकत और तकनीकी विशेषताएं
F/A-18 फाइटर जेट को अमेरिकी नौसेना ने विकसित किया है और यह एक मल्टी-रोल जेट है, जिसे समुद्री युद्ध, जमीनी हमले और हवाई लड़ाई में उपयोग किया जा सकता है। यह दो पायलटों के बैठने की सुविधा के साथ आता है, हालांकि आमतौर पर इसमें केवल एक पायलट होता है जबकि दूसरा सीट वेपन सिस्टम ऑफिसर के लिए होती है। इस फाइटर जेट का लंबाई 56.1 फीट (17 मीटर) है और इसकी विंगस्पैन 40.5 फीट (12.3 मीटर) है।
जब कोई F/A-18 जेट जंग के लिए तैयार होता है तो इसका वजन बढ़कर 23,451 किलोग्राम (23.4 टन) हो जाता है, जिसमें हथियार और ईंधन शामिल होते हैं। इसके खाली वजन की बात करें तो यह लगभग 10,433 किलो (10.4 टन) होता है। इस जेट में एक शक्तिशाली इंजन और अत्याधुनिक हथियार प्रणाली है, जो इसे युद्ध के दौरान उच्चतम प्रदर्शन देने में सक्षम बनाता है।
भारत और अमेरिकी फाइटर जेट्स की तुलना
जब भारतीय नौसेना ने अपने नए एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत के लिए फाइटर जेट्स की तलाश शुरू की थी, तब अमेरिकी F/A-18 और फ्रांस के राफेल-एम के बीच कड़ा मुकाबला था। अमेरिकी F/A-18 को भारतीय नौसेना के लिए पिच किया गया था, लेकिन भारतीय नौसेना ने अंततः राफेल-एम को चुना। राफेल-एम की सफलता की वजह उसकी उन्नत तकनीकी विशेषताएं और भारतीय नौसेना की विशिष्ट आवश्यकताएं थीं।
राफेल-एम की बहुमुखी क्षमताएं और बेहतर रेंज ने भारतीय अधिकारियों को प्रभावित किया, जबकि F/A-18 के मुकाबले राफेल-एम को अधिक प्रतिस्पर्धात्मक और सामरिक दृष्टिकोण से बेहतर माना गया। इसके अलावा, राफेल की बेहतर इंटिग्रेटेड इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, उच्चतम लोड-बearing क्षमता और एयर-टू-एयर, एयर-टू-ग्राउंड स्ट्राइक की उन्नत क्षमताएं भारतीय नौसेना की आवश्यकता के अनुरूप थीं।
F/A-18 का नुकसान और US Navy की स्थिति
हाल ही में अमेरिकी नौसेना द्वारा गलती से F/A-18 के गिरने से अमेरिकी नौसेना को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है, जिसकी कीमत लगभग 473 से 484 करोड़ रुपये के बीच बताई जा रही है। हालांकि इस विमान का वैरिएंट और उसका सटीक मूल्य अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन यह एक महंगे और उच्चतम तकनीकी विमान के रूप में जाना जाता है। यह दुर्घटना अमेरिकी नौसेना के लिए एक झटका है, और इसके परिणामस्वरूप उनके सामरिक और वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ा है।
आखिर क्यों F/A-18 को नकारा गया?
भारतीय नौसेना ने अमेरिकी F/A-18 को नकारा और राफेल-एम को चुना। इसकी मुख्य वजह राफेल-एम की तकनीकी उन्नति और भारतीय नौसेना की आवश्यकताएं थीं। राफेल-एम को अधिक प्रभावी लड़ाई क्षमता, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमता और उन्नत हवाई स्ट्राइक ऑपरेशंस के लिए डिजाइन किया गया है। इसके मुकाबले, जबकि F/A-18 भी एक मजबूत विमान है, भारत के लिए राफेल-एम को प्राथमिकता दी गई, क्योंकि वह भारतीय समुद्री युद्ध के अनुकूल अधिक उपयुक्त था।
Kazan Drone Attack: रूस के कजान में 9/11 जैसा हमला, तीन इमारतों पर ड्रोन से हमला