George Soros को लेकर केंद्रीय मंत्री और शशि थरूर में टकराव, पुरानी मुलाकात पर उठे सवाल

By Editor
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George Soros

थरूर और हरदीप पुरी में George Soros को लेकर तकरार, 15 साल पुराने ट्वीट पर उठे सवाल

भारतीय राजनीति में इन दिनों अमेरिकी अरबपति George Soros का नाम चर्चा का केंद्र बना हुआ है, खासकर जब से भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व पर George Soros के साथ कथित संबंधों का आरोप लगाया है। इस मुद्दे को लेकर अब केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी और कांग्रेस सांसद शशि थरूर के बीच सोशल मीडिया पर तीखी नोक-झोंक देखने को मिली है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं, और इस विवाद में 15 साल पुरानी एक मुलाकात पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

थरूर ने दी सफाई: पुरानी मुलाकात पर आरोपों पर नाराजगी

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी पर आरोप लगाए हैं कि वह उनके खिलाफ गलत जानकारी फैला रहे हैं। थरूर ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि जब वह 2009 में विदेश राज्यमंत्री के तौर पर न्यूयॉर्क गए थे, तब भारत के राजदूत हरदीप पुरी ने कई प्रमुख अमेरिकियों को डिनर पर बुलाया था, जिसमें George Soros भी शामिल थे। थरूर ने कहा, “उस डिनर में शामिल होने के लिए मुझे आमंत्रित किया गया था, और इसका उद्देश्य सिर्फ बातचीत करना था, न कि किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना।”

थरूर ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि 15 साल पुरानी मुलाकात को लेकर बेतुके आरोप लगाए जा रहे हैं, जो उनके लिए बेहद असंवेदनशील और गलत हैं। उन्होंने कहा कि लोग अब पुराने ट्वीट्स और बयानों को संदर्भ में लाकर उन्हें विवादों में घसीटने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि गलत है।

हरदीप पुरी का जवाब: थरूर ने छिपाई पूरी तस्वीर

इस विवाद पर केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी ने अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि शशि थरूर ने इस मुद्दे को लेकर पूरी तस्वीर नहीं दिखाई है। पुरी ने बताया कि “2009 के उस डिनर में आमंत्रित लोगों की सूची उन्होंने ही दी थी, और जिन व्यक्तियों का जिक्र किया जा रहा है, वे राजीव गांधी फाउंडेशन के दानदाता थे।” उनका कहना था कि उस समय थरूर विदेश राज्यमंत्री थे और उनका यह उद्देश्य था कि वे इन दानदाताओं से मुलाकात करें।

पुरी ने यह भी बताया कि वह उस समय पहली बार George Soros से मिले थे, और यह मुलाकात महज एक औपचारिक बैठक थी। उन्होंने इस बात को स्पष्ट किया कि इस मुलाकात का किसी भी तरह से राजनीति से कोई संबंध नहीं था और न ही इसका कोई विवादास्पद पहलू था।

भा.ज.पा. का आरोप: George Soros के संगठन से कांग्रेस का संबंध

इस विवाद की जड़ भाजपा के आरोपों में छिपी हुई है। भाजपा ने 8 दिसंबर को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर करते हुए दावा किया था कि कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ऐसे संगठन से जुड़ी हुई हैं, जो कश्मीर को भारत से अलग करने की वकालत करता है। भाजपा ने यह आरोप भी लगाया कि इस संगठन को जॉर्ज सोरोस फाउंडेशन से फंडिंग मिलती है। भाजपा ने इस संगठन का नाम “फोरम ऑफ डेमोक्रेटिक” बताया, जो कथित रूप से कश्मीर को भारत से अलग करने की कोशिशों में शामिल है।

भा.ज.पा. ने अपनी पोस्ट में कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए और यह सवाल उठाया कि क्या इस संगठन से जुड़कर सोनिया गांधी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो सकती हैं। भाजपा के इस आरोप के बाद से राजनीतिक माहौल और भी गर्म हो गया है, और जॉर्ज सोरोस का नाम फिर से विवादों में आ गया है।

कांग्रेस ने किया भाजपा के आरोपों का खंडन

भा.ज.पा. के आरोपों के बाद कांग्रेस पार्टी ने अपनी सफाई दी। कांग्रेस के नेताओं ने कहा कि भाजपा द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से आधारहीन और राजनीति से प्रेरित हैं। पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह आरोप केवल और केवल कांग्रेस के खिलाफ एक राजनीतिक चाल के रूप में लगाए गए हैं, ताकि जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटा दिया जाए।

कांग्रेस ने यह भी स्पष्ट किया कि जॉर्ज सोरोस के साथ संबंधों को लेकर जो आरोप भाजपा ने लगाए हैं, वे पूरी तरह से झूठे हैं। कांग्रेस पार्टी का कहना है कि भाजपा इस तरह के आरोपों से अपनी राजनीतिक असफलताओं और असल मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है।

George Soros का प्रभाव और भारतीय राजनीति

George Soros एक अमेरिकी अरबपति हैं, जो अपनी विश्वभर में निवेश और सामाजिक कार्यों के लिए प्रसिद्ध हैं। उनके द्वारा किए गए निवेश और उनके प्रभाव के कारण भारतीय राजनीति में भी उनका नाम कई बार विवादों में आ चुका है। हालांकि, सोरोस ने हमेशा ही कहा है कि उनका उद्देश्य केवल आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है, और उनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।

भारत में George Soros का नाम खासकर तब चर्चा में आया जब भाजपा ने उनके फाउंडेशन और कश्मीर मुद्दे को लेकर आरोप लगाए। इससे पहले भी उनके राजनीतिक प्रभाव को लेकर कई चर्चाएं हो चुकी हैं, और उनकी भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं।


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