नेतन्याहू ने बताया इजरायल सेना का प्लान, Mount Hermon पर तैनात, इन दो दुश्मनों पर होगी निगरानी

By Editor
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Mount Hermon

Mount Hermon पर इजरायल का कब्जा: क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक उद्देश्य

इजरायल ने Mount Hermon पर अपने सैन्य नियंत्रण को स्थापित कर दिया है, जो कि सीरिया के बफर जोन के अंतर्गत आता है। यह इलाका गोलन पहाड़ियों से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित है, जिसे इजरायल ने 1967 में युद्ध के दौरान कब्जा किया था। इस नई सैन्य तैनाती को लेकर इजरायल की रक्षा रणनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि Mount Hermon पर इजरायल का कब्जा क्यों महत्वपूर्ण है और इसके क्या निहितार्थ हो सकते हैं।

Mount Hermon: भूगोल और ऐतिहासिक संदर्भ

Mount Hermon, जो कि 2,814 मीटर ऊंचा है, सीरिया और लेबनान की सीमा पर स्थित एक प्रमुख पर्वत श्रृंखला है। यह पर्वत सीरिया और इजरायल के बीच की सीमा से 10 किलोमीटर दूर स्थित है और इसे सीरिया की ज़मीन पर बने बफर जोन का हिस्सा माना जाता है। 1967 के युद्ध में इजरायल ने गोलन पहाड़ियों पर कब्जा किया था, जो अब इजरायल के नियंत्रण में हैं। हालांकि, इस क्षेत्र पर इजरायल का कब्जा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादित है, और इसे दुनिया के अधिकांश देशों द्वारा अवैध माना जाता है।

2018 में, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गोलन हाइट्स को इजरायल का हिस्सा मानते हुए इसे इजरायल के नियंत्रण में करार दिया था। इसके बावजूद, यह क्षेत्र सीरिया के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, और इजरायल के लिए यह एक महत्वपूर्ण सैन्य क़व्ज़ा साबित हुआ है।

इजरायल की सैन्य तैनाती

इजरायल ने Mount Hermon में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। 8 दिसंबर को जब सीरिया की राजधानी दमिश्क में इस्लामिक विद्रोहियों ने कब्जा किया, तो सीरिया के सैन्य पोस्टों पर तैनात सैनिकों ने पलायन किया। इसके बाद, इजरायल ने टैंक और सैन्य बलों के साथ माउंट हरमन में प्रवेश किया। इस कदम ने क्षेत्र में तनाव को बढ़ा दिया, और सऊदी अरब समेत अन्य अरब देशों ने इजरायल की कार्रवाई की आलोचना की। हालांकि, इजरायल ने अपनी सैन्य तैनाती को एक सुरक्षा उपाय बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए किया गया है।

नेतन्याहू का बयान: Mount Hermon पर निगरानी

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने Mount Hermon की यात्रा करते हुए स्पष्ट किया कि इजरायल की सेना वहां पर स्थायी रूप से तैनात रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि Mount Hermon से इजरायल को क्षेत्र पर पूरी निगरानी रखने का मौका मिलेगा। यह बयान इजरायल के इरादे को स्पष्ट करता है कि इजरायल अपनी सैन्य तैनाती को केवल अस्थायी नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीति के रूप में देख रहा है।

सुरक्षा और रणनीतिक उद्देश्य

नेतन्याहू और इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काज ने कहा कि Mount Hermon से इजरायल को सीरिया और लेबनान दोनों देशों पर नजर रखने की सुविधा मिलेगी। Mount Hermon से इजरायल को लेबनान के दक्षिण में स्थित हिजबुल्ला की गतिविधियों पर नजर रखने का मौका मिलेगा, जबकि सीरिया की राजधानी दमिश्क पर भी निगरानी रखी जा सकेगी। यह स्थिति इजरायल को सैन्य दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करती है, क्योंकि यह उन्हें दो प्रमुख दुश्मनों — हिजबुल्ला और सीरिया — के आंदोलनों पर कड़ी निगरानी रखने का अवसर देती है।

इजरायल की सीमा और क्षेत्रीय प्रभाव

Mount Hermon पर इजरायल की सैन्य तैनाती, न केवल एक रणनीतिक कदम है, बल्कि यह इजरायल की क्षेत्रीय शक्ति और प्रभाव को भी मजबूत करने का एक उपाय है। इजरायल की सीमा अब और विस्तारित हो चुकी है, और इजरायल के सैन्य बलों के लिए यह क्षेत्र एक स्थायी सैन्य पोस्ट बन सकता है। इससे इजरायल को न केवल अपनी सुरक्षा बढ़ाने का मौका मिलेगा, बल्कि वह अपने दुश्मनों की गतिविधियों को भी प्रभावी ढंग से ट्रैक कर सकेगा।

क्षेत्रीय प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय स्थिति

इजरायल की इस सैन्य कार्रवाई पर विभिन्न देशों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं रही हैं। सऊदी अरब और अन्य अरब देशों ने इस कार्रवाई की निंदा की है, और इसे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ाने वाला कदम करार दिया है। वहीं, इजरायल का कहना है कि यह कदम केवल सुरक्षा कारणों से उठाया गया है, और वह क्षेत्र में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं चाहता। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेषकर सीरिया और लेबनान, ने इस तैनाती को अवैध और अनधिकृत बताया है, और इस पर कठोर प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

किलेबंदी और भविष्य की रणनीति

Mount Hermon में इजरायल ने अपनी सैन्य तैनाती को मजबूत करने के लिए किलेबंदी का काम भी शुरू कर दिया है। यह किलेबंदी इजरायल की सेना के लिए एक महत्वपूर्ण रक्षा तंत्र साबित हो सकती है, जो भविष्य में किसी भी सैन्य संघर्ष या क्षेत्रीय तनाव के दौरान उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करेगी। यह कदम इजरायल की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है, जो क्षेत्र में अपनी सैन्य और रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करना चाहता है।

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