बिहार की राजनीति में एक बार फिर दिलचस्प मोड़ देखने को मिला है। रविवार को पूर्णिया में आयोजित रैली में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में अपनी NDA के प्रति निष्ठा जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वह कहीं नहीं जाएंगे और हमेशा जदयू के साथ रहेंगे। इस दौरान पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए उनकी बातों का समर्थन किया और तालियां बजाईं।
नीतीश ने अपने बयान में इशारों-इशारों में जदयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि पार्टी के कुछ लोगों ने उन्हें भटकाया था। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अब वह सब अतीत की बातें हैं। इससे पहले मई में मधुबनी की रैली में भी नीतीश ने ललन सिंह पर निशाना साधा था।
नीतीश कुमार अब तक NDA को दो बार छोड़ चुके हैं—पहली बार 2014 लोकसभा चुनाव से पहले और दूसरी बार 2022 में, जब जदयू ने RJD के साथ सरकार बनाई। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बार-बार अपनी निष्ठा जताने का मकसद उनकी अस्थिर राजनीतिक छवि को संतुलित करना है। पूर्णिया रैली में उनका यह बयान यह भी दर्शाता है कि बिहार की राजनीतिक गठबंधन और संबंध हमेशा गतिशील रहे हैं।