शाम 5:47 से रात 9:00 बजे तक रहेगा शुभ मुहूर्त, जानिए पूजा विधि और यम दीपक का महत्व
नई दिल्ली। दीपोत्सव का दूसरा दिन — नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है, इस बार 19 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक माना जाता है। इसे भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय और यमराज की आराधना के लिए शुभ अवसर के रूप में मनाया जाता है।
शुभ मुहूर्त और तिथि:
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 19 अक्टूबर को दोपहर 1:53 बजे से शुरू होकर अगले दिन दोपहर 3:46 बजे तक रहेगी। पूजा सूर्यास्त के बाद की जाती है। शाम 5:47 बजे से रात 9:00 बजे तक का समय पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।
पौराणिक महत्व:
मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध कर सोलह हजार कन्याओं को बंधन से मुक्त कराया था। इसीलिए यह दिन ‘नरक चतुर्दशी’ कहलाता है — जो मुक्ति, प्रकाश और स्वतंत्रता का प्रतीक है।
पूजा विधि:
शाम को शुभ मुहूर्त में पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और सबसे पहले गणेश जी की स्तुति करें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण, माता लक्ष्मी और हनुमान जी की पूजा करें। पूजा में फूल, अक्षत, दीप और मिष्ठान अर्पित करें।
- हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- माता लक्ष्मी के मंत्रों का जप करें।
- अंत में आरती कर परिवार में प्रसाद वितरित करें।
यम दीप दान:
इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण विधान है यम दीप दान। सूर्यास्त के बाद दक्षिण दिशा में यमराज के नाम का दीपक जलाया जाता है। ऐसा करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और घर में दीर्घायु व समृद्धि बनी रहती है।
यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। Update India TV एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।