जयपुर। राजस्थान सरकार ने बुधवार को पेश बजट में कई अहम वित्तीय फैसलों की घोषणा की है, जिनका सीधा असर संपत्ति की रजिस्ट्री, स्टांप ड्यूटी और वाहन पंजीकरण पर पड़ेगा। कुछ फैसलों से जहां अचल संपत्ति का लेनदेन महंगा होगा, वहीं ऋण दस्तावेजों और वाहन पंजीकरण में राहत दी गई है।
स्टांप ड्यूटी और डीएलसी दरों में बदलाव
सरकार ने स्टांप पेपर पर लगने वाले सरचार्ज में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। इससे स्टांप पेपर की खरीद महंगी हो जाएगी। इसके साथ ही विभिन्न श्रेणियों की जमीनों की डीएलसी दरों में बदलाव करते हुए पूरे प्रदेश में एक समान दर लागू करने का निर्णय लिया गया है। इन दोनों फैसलों का असर संपत्ति की रजिस्ट्री पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ के रूप में दिखाई देगा।
लोन डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन शुल्क आधा
बजट में बैंक या वित्तीय संस्थानों से लिए जाने वाले ऋण से संबंधित दस्तावेजों की रजिस्ट्रेशन फीस 1 प्रतिशत से घटाकर 0.5 प्रतिशत कर दी गई है। इसकी अधिकतम सीमा 1 लाख रुपये तय की गई है। साथ ही इन दस्तावेजों पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी 0.25 प्रतिशत से घटाकर 0.125 प्रतिशत कर दी गई है। इसकी अधिकतम सीमा भी 15 लाख रुपये से घटाकर 10 लाख रुपये कर दी गई है। इससे लोन लेने वालों को सीधी राहत मिलेगी।
फार्म हाउस और रिसोर्ट जमीन महंगी
सरकार ने फार्म हाउस जमीन की डीएलसी दर 1.5 गुना से बढ़ाकर 3 गुना कर दी है। वहीं रिसोर्ट भूमि की रजिस्ट्री के लिए बाजार मूल्य अब संबंधित क्षेत्र की व्यावसायिक दर के 75 प्रतिशत के आधार पर तय किया जाएगा, जिससे इन श्रेणियों की जमीनों की रजिस्ट्री महंगी होगी।
दूसरे राज्य से वाहन लाने पर 50% तक छूट
भजनलाल शर्मा सरकार ने दूसरे राज्यों से स्थायी रूप से निजी वाहन लाने पर मोटर व्हीकल टैक्स में छूट 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी है। इससे वाहन मालिकों को पंजीकरण के समय राहत मिलेगी। कुल मिलाकर बजट के इन फैसलों से जहां संपत्ति खरीद-फरोख्त महंगी होने जा रही है, वहीं ऋण दस्तावेजों और वाहन पंजीकरण में राहत का संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
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