अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने मिडिल ईस्ट में हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना इस वीकेंड (22 फरवरी तक) संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है, हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है। सूत्रों के अनुसार, व्हाइट हाउस को सूचित कर दिया गया है कि आदेश मिलते ही कुछ घंटों के भीतर कार्रवाई की जा सकती है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी
पिछले कुछ दिनों में क्षेत्र में अमेरिकी वायु और नौसैनिक ताकत में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। दुनिया का अत्याधुनिक विमानवाहक पोत USS गेराल्ड आर फोर्ड भी क्षेत्र में तैनाती के लिए तैयार बताया जा रहा है। इसके अलावा ब्रिटेन में तैनात अमेरिकी फाइटर जेट और एयर-टैंकर विमानों को मिडिल ईस्ट की ओर भेजा जा रहा है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि कूटनीति राष्ट्रपति ट्रंप की पहली प्राथमिकता है, लेकिन सैन्य विकल्प भी मेज पर मौजूद है। उन्होंने किसी संभावित कार्रवाई की समयसीमा बताने से इनकार किया।

जिनेवा वार्ता बेनतीजा
मंगलवार को जिनेवा में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच करीब साढ़े तीन घंटे तक अप्रत्यक्ष बातचीत हुई। ईरान ने दावा किया कि कुछ मार्गदर्शक सिद्धांतों पर सहमति बनी है, जबकि अमेरिकी पक्ष का कहना है कि अभी कई मुद्दों पर स्पष्टता बाकी है।
परमाणु कार्यक्रम पर बढ़ा दबाव
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 28 फरवरी को इजरायल का दौरा करेंगे, जहां वे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात करेंगे। इजरायल लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख अपनाए हुए है। उधर सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों को और मजबूत कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कई अहम स्थलों को कंक्रीट और मिट्टी की मोटी परत से ढका जा रहा है, ताकि संभावित हवाई हमलों से बचाव किया जा सके।
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