सिरोही जिले के वाटेरा, भीमाना, भारजा और रोहिड़ा गांवों में नहीं जले दीप — विरोध में काले झंडे, आंसुओं के बीच गूंजा सवाल — “हमारा भविष्य अंधेरे में क्यों?”
सिरोही: जब देशभर में दीपावली की रौशनी घर-घर में जगमगा रही थी, सिरोही जिले की पिण्डवाड़ा तहसील के कई गांव अंधेरे में डूबे रहे। यहां वाटेरा, भीमाना, भारजा और रोहिड़ा ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने इस बार दीपावली नहीं मनाई, बल्कि “काली दिवाली” के रूप में विरोध दर्ज कराया।
ग्रामीणों के हाथों में काले झंडे थे, घरों में न दीप जले, न मिठाइयाँ बंटी। आंखों में आंसू और होंठों पर सवाल था — “हमारा कसूर क्या है?” ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले एक महीने से क्षेत्र में प्रस्तावित चुना खनन परियोजना के विरोध में आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन ने अब तक उनकी कोई सुनवाई नहीं की।
जानकारी के अनुसार, पिण्डवाड़ा क्षेत्र में कमलेश मेटा कास्ट नामक निजी कंपनी को लगभग 800 हेक्टेयर भूमि चुना खनन परियोजना के लिए प्रस्तावित की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह परियोजना उनके गांवों की जमीन, जलस्रोत और जंगलों को नष्ट कर देगी।
एक ग्रामीण महिला ने भावुक होकर कहा, “हमारे बच्चों का भविष्य दांव पर है। खेत-खलिहान चले जाएंगे तो हम कहाँ जाएंगे? हमारी दिवाली तो सरकार ने काली कर दी।”
इसी बीच, ग्रामीणों ने सरकार से परियोजना को तुरंत रद्द करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो विरोध और उग्र रूप ले सकता है। इस बार सिरोही की घाटियों में अंधेरा केवल दीपों का नहीं था, बल्कि संवेदनाओं और उम्मीदों का भी।