राजस्थान में मानसून की मेहरबानी: 226 बांध हुए ओवरफ्लो

By admin
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इस मानसून में प्रदेशभर में हो रही अच्छी वर्षा से बांध और जलाशय लबालब होकर छलकने लगे हैं। अब तक राज्य के कुल 226 बांध पूरी तरह भर गए हैं या ओवरफ्लो हो गए हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अच्छी बारिश पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रदेश की समृद्धि एवं खुशहाली का शुभ संकेत है। इस बारिश से प्रदेश में चारों तरफ हरियाली छा गई है और खेतों में फसलें लहलहा रही हैं। जल स्त्रोतों की भराव स्थिति से किसानों सहित सभी वर्गों में उत्साह है। 

शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान तथा वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान के सार्थक परिणाम अब नजर आने लगे हैं। बारिश का अतिरिक्त पानी कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान के अंतर्गत बने रिचार्ज शाफ्ट और जल संरक्षण संरचनाओं के माध्यम से जमीन में जा रहा है और भूजल का पुनर्भरण हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के अंतर्गत प्रवासी राजस्थानियों के सहयोग से अगले चार वर्षों में 45 हजार जल संरचनाएं बनाई जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी प्रकार प्रदेशभर में चलाए गए वंदे गंगा जल संरक्षण-जन अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण और संचयन के कार्यों से भी वर्षा जल संग्रहण में मदद मिल रही है। इसके तहत जलाशयों की मरम्मत, सफाई, जल निकासी व्यवस्था में सुधार, अतिक्रमण हटाना, बांध क्षेत्रों में श्रमदान, पौधारोपण, जल संग्रहण और जल संरक्षण संरचनाओं सम्बंधित कार्य किए गए। इन प्रयासों से वर्षा जल सीधे जलाशयों में पहुंच रहा है।

शर्मा ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वर्षाकाल में विशेष सावधानी बरतें। भारी बारिश, आकाशीय बिजली एवं अन्य प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए पूरी तरह सतर्क रहें। साथ ही, नदी-नालों के बहाव क्षेत्रों एवं जर्जर भवनों से दूर रहें तथा जल भराव वाले मार्गों व पुलों को पार करने से बचें।

मानसून के अभी 2 माह शेष, अब तक 87.07 प्रतिशत वर्षा दर्ज —

उल्लेखनीय है कि राज्य में 1 जून से 28 जुलाई, 2025 तक 369.79 एमएम वर्षा दर्ज हुई है। यह इस समय अवधि में होने वाली सामान्य वर्षा 196.79 एमएम से 87.91 प्रतिशत अधिक है। राज्य में मानसून काल में सामान्य वर्षा औसतन 424.71 एमएम मानी जाती है। इस प्रकार, अब तक 87.07 प्रतिशत वर्षा दर्ज हो चुकी है जबकि मानसून काल 30 सितम्बर तक माना जाता है। यह इस वर्ष बेहतर जल संग्रहण की स्थिति को भी दर्शाता है। प्रदेश में इस मानसून में सबसे अधिक वर्षा 1261 मिमी कोटा जिले के रामगंज मंडी क्षेत्र में दर्ज हुई। 

बांधों में 75.33 प्रतिशत जल संग्रहित —

राज्य के जल संसाधन विभाग के अंतर्गत कुल 693 बांधों की पूर्ण भराव क्षमता 13026.511 एमक्यूएम है। इसमें से वर्तमान में 9813.162 एमक्यूएम जल संग्रहित है। यह कुल पूर्ण भराव क्षमता का 75.33 प्रतिशत है। बांधों में 15 जून से 28 जुलाई, 2025 तक 4167.89 एमक्यूएम (32 प्रतिशत) जल की आवक हुई है। राज्य के 23 वृहद बांधों में कुल पूर्ण भराव क्षमता 8196.754 एमक्यूएम है, जिनमें अभी 6896.52 एमक्यूएम (84.14 प्रतिशत) जल संग्रहित है। वहीं 670 मध्यम व लघु बांधों में 4829.756 एमक्यूएम पूर्ण भराव क्षमता के मुकाबले 2916.64 एमक्यूएम (60.39 प्रतिशत) जल भरा हुआ है। 

टोंक स्थित बीसलपुर बांध के सोमवार को 6 गेट खोले गए।  पहली बार यह  बांध जुलाई माह में ही ओवरफ्लो हुआ है। वहीं, कोटा स्थित नवनेरा बांध के 13 गेट खोले गए हैं। ईसरदा बांध के कैचमेंट एरिया में अच्छी वर्षा होने से जल प्रवाह शुरू हो गया है। आगामी समय में बीसलपुर से ईसरदा में जल संग्रहित किया जाएगा। साथ ही, कई बांध भी पूर्ण भराव क्षमता पर आ गए हैं।

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