JMM: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के खिलाफ एक कड़ा कदम उठाते हुए 1.36 लाख करोड़ रुपये के बकाये के लिए विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह बकाया मुख्य रूप से कोयला के राजस्व मद से संबंधित है, जिसे केंद्र सरकार ने झारखंड को नहीं लौटाया है। केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में बिहार के सांसद पप्पू यादव के सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि कोयले के राजस्व मद में झारखंड का कोई बकाया नहीं है, जो कि झारखंड सरकार के लिए बड़ा झटका था। इसके बाद राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए इस मुद्दे पर कार्रवाई करने का फैसला किया है।
कोयले के राजस्व मद में बकाया
पिछले कुछ वर्षों से झारखंड सरकार लगातार कोयले के राजस्व मद में अपने बकाये की वसूली की मांग करती रही है। झारखंड का यह बकाया करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये है, जो राज्य को केंद्र सरकार से मिलने चाहिए थे। यह राशि राज्य के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, खासकर शिक्षा, स्वास्थ्य, और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में निवेश के लिए। लेकिन केंद्रीय सरकार की ओर से बार-बार इस बकाये को न लौटाने के कारण राज्य सरकार को न केवल आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है, बल्कि इसके कारण राज्य के नागरिकों की बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति भी प्रभावित हो रही है।
झारखंड सरकार का एक्शन मोड
JMM: केंद्र सरकार से बार-बार अनसुनी होने के बाद अब झारखंड सरकार ने कड़ी कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। 28 नवंबर 2021 को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया था कि केंद्र और केंद्रीय उपक्रमों से 1.36 लाख करोड़ रुपये की वसूली के लिए विधिक कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद झारखंड सरकार ने विधिक प्रक्रिया को प्रारंभ कर दिया है और 15 दिनों का अल्टीमेटम भी जारी किया है।
राज्य के भू-राजस्व विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि इस राशि की वसूली के लिए तत्काल विधिक कदम उठाए जाएंगे। विभाग ने विशेष सचिव को इस मामले में नोडल अधिकारी नियुक्त किया है, जो कोल इंडिया लिमिटेड और उसकी विभिन्न अनुषंगी इकाइयों से लंबित बकाया राशि जैसे वॉश्ड कोल रॉयल्टी ड्यूज, कॉमन कॉज ड्यूज आदि के भुगतान में आ रही वैधानिक अड़चनों को हल करने के लिए खान विभाग और महाधिवक्ता से समन्वय करेंगे।
JMM की चेतावनी
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार को चेतावनी दी है। JMM ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो झारखंड राज्य में कोयला आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। पार्टी के नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि राज्य सरकार को यह अधिकार है कि वह अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कोल इंडिया और अन्य केंद्रीय उपक्रमों से बकाया राशि वसूलने के लिए सभी वैधानिक उपायों का इस्तेमाल करें।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अपील
JMM: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भाजपा के सांसदों से अपील की है कि वे राज्य के विकास के लिए इस जायज मांग को उठाने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि भाजपा के सांसदों को चाहिए कि वे इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाएं और केंद्र सरकार से बकाया राशि की वापसी के लिए दबाव डालें। सोरेन ने यह भी कहा कि यह राशि झारखंड के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, और राज्य सरकार इसे वापस पाने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।
विधिक कार्रवाई का प्रारंभ
JMM: भू-राजस्व विभाग द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि 15 दिनों के भीतर विधिक कार्रवाई शुरू की जाएगी। इस आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि विभाग के सचिव को इस प्रक्रिया की प्रगति से अवगत कराया जाएगा। विधिक कार्रवाई में सहयोग के लिए राजस्व निबंधन और भूमि सुधार विभाग के संयुक्त सचिव भी विभागीय नोडल अधिकारी को सहायता प्रदान करेंगे।
राज्य के विकास के लिए बकाया राशि की अहमियत
JMM: झारखंड के लिए यह बकाया राशि सिर्फ एक वित्तीय मुद्दा नहीं है, बल्कि राज्य के समग्र विकास के लिए यह एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है। केंद्र से यह बकाया राशि मिलने के बाद राज्य सरकार इन पैसों का उपयोग विभिन्न विकासात्मक योजनाओं में करेगी, जिनमें सड़क निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, जल आपूर्ति, और अन्य बुनियादी सुविधाओं का सुधार शामिल है। इसके अलावा, यह राशि झारखंड के खनिज संसाधनों से संबंधित मामलों के समाधान के लिए भी जरूरी है।
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