पाँच वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने प्रदेश की संस्कृति और कला को दी वैश्विक पहचान: Mohan Yadav

By Editor
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Mohan Yadav

डॉ. Mohan Yadav ने प्रदेश की सांस्कृतिक और कला धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने पर गर्व व्यक्त किया

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. Mohan Yadav ने प्रदेश की सांस्कृतिक और कला धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए हाल ही में बनाए गए पांच गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की सराहना की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज सांस्कृतिक अभ्युदय के नए युग में प्रवेश कर रहा है, और प्रदेश ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए एक नई पहचान बनाई है।

प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान मिलना
मुख्यमंत्री डॉ. Mohan Yadav ने यह स्पष्ट किया कि प्रदेश में हुए सांस्कृतिक आयोजनों और धरोहरों को आज की पीढ़ी से जोड़ते हुए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराना, प्रदेश की कला और संस्कृति के लिए गौरवपूर्ण है। उन्होंने बताया कि तानसेन समारोह, खजुराहो नृत्य समारोह, महाकाल लोक में डमरू वादन जैसे आयोजनों ने प्रदेश को न केवल भारत में बल्कि दुनियाभर में एक नई पहचान दी है। इन रिकॉर्ड्स ने मध्यप्रदेश की संस्कृति और कला को वैश्विक स्तर पर मान्यता दिलाई है।

तनसेन समारोह में शास्त्रीय संगीत की धुन पर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
मुख्यमंत्री डॉ. Mohan Yadav ने ग्वालियर में आयोजित तानसेन समारोह के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि ग्वालियर किले की प्राचीर पर 1282 तबला साधकों ने जब ‘वन्दे मातरम’ की धुन पर प्रस्तुति दी, तो इसने प्रदेश के शास्त्रीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाई। यह प्रस्तुति 25 दिसंबर 2023 को गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज की गई और इसने प्रदेश के संगीत के गौरव को एक नई ऊँचाई दी।

खजुराहो नृत्य समारोह में कथक नृत्य का गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
मुख्यमंत्री ने खजुराहो में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय खजुराहो नृत्य समारोह का भी उल्लेख किया, जिसमें 1484 कथक नृत्य साधकों ने ‘राग बसंत’ की लय पर थिरकते हुए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड रचा। यह रिकॉर्ड 20 फरवरी 2024 को बनवाने का लक्ष्य रखा गया है, जो न केवल प्रदेश की संस्कृति बल्कि भारतीय कला को भी वैश्विक मंच पर और अधिक सम्मानित करेगा।

उज्जैन में डमरू वादन से बना गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
मुख्यमंत्री डॉ. Mohan Yadav ने उज्जैन में भगवान महाकाल के नगर भ्रमण के दौरान डमरू वादन का रिकॉर्ड भी उल्लेख किया। 5 अगस्त 2024 को महाकाल लोक में 1500 से अधिक डमरू वादकों ने एक साथ लयबद्ध डमरू वादन कर एक और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। इस रिकॉर्ड को सिर्फ एक सांस्कृतिक आयोजन के रूप में नहीं बल्कि आध्यात्मिक पुनरुत्थान का प्रतीक भी माना गया। इस आयोजन ने प्रदेश के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया।

गीता जयंती पर गीता के कर्मयोग का सस्वर पाठ
डॉ. Mohan Yadav ने 11 दिसंबर 2024 को गीता जयंती के अवसर पर गीता के कर्मयोग का सस्वर पाठ कर चौथा गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का उल्लेख भी किया। 1721 आचार्य और बटुकों के साथ किया गया यह पाठ एक ऐतिहासिक उपलब्धि था और इसने भारत की सांस्कृतिक धरोहर, विशेषकर गीता के महत्व को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।

तानसेन संगीत समारोह में शास्त्रीय बैंड की प्रस्तुति
डॉ. Mohan Yadav ने शास्त्रीय संगीत और वाद्यों की परंपरा को जीवित रखते हुए तानसेन संगीत समारोह का शताब्दी समारोह मनाने के महत्व को भी समझाया। उन्होंने बताया कि ग्वालियर किले की प्राचीर से 546 कला साधकों द्वारा 9 शास्त्रीय वाद्यों पर समवेत प्रस्तुति ने भारतीय शास्त्रीय संगीत को पूरी दुनिया में पहचान दिलाई और यह पांचवां गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनवाने का कारण बना।

प्रधानमंत्री मोदी का सांस्कृतिक पुनर्जागरण के प्रति योगदान
डॉ. Mohan Yadav ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत एक नया अध्याय लिख रहा है, जहां सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनर्जागरण की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री का मानना है कि इन गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स को सिर्फ उपलब्धियों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत के पुनर्निर्माण का प्रतीक हैं।

मध्यप्रदेश का सांस्कृतिक अभ्युदय में योगदान
डॉ. Mohan Yadav ने कहा कि आने वाले समय में मध्यप्रदेश सिर्फ देश का सांस्कृतिक केंद्र नहीं बनेगा, बल्कि यह प्रदेश सांस्कृतिक अभ्युदय के नए युग की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाएगा। मध्यप्रदेश के इस सांस्कृतिक योगदान को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाना राज्य सरकार के लिए गर्व की बात है। डॉ. यादव ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कार्यों के जरिए मध्यप्रदेश को एक सशक्त सांस्कृतिक पहचान देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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