सैनी समाज से प्रत्याशी देकर बीजेपी ने बदला चुनावी समीकरण, कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया और निर्दलीय नरेश मीणा से होगा त्रिकोणीय मुकाबला
राजस्थान की सियासत में एक बार फिर उपचुनाव की सरगर्मी बढ़ गई है। अंता विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर बीजेपी ने लंबा इंतज़ार खत्म करते हुए मोरपाल सुमन को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। यह वही सीट है जो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के करीबी कंवरलाल मीणा की सदस्यता रद्द होने के बाद खाली हुई थी।
मोरपाल सुमन स्थानीय नेता माने जाते हैं और उनकी छवि लो प्रोफाइल लेकिन संगठन से जुड़ी हुई है। जातीय समीकरणों को साधने के लिए बीजेपी ने सैनी समाज से उम्मीदवार देने का फैसला किया है — वही समाज जिससे मोरपाल सुमन और पूर्व मंत्री प्रभुलाल सैनी दोनों आते हैं। प्रभुलाल भी टिकट की दौड़ में थे, लेकिन पार्टी ने अंततः वसुंधरा खेमे के मोरपाल सुमन पर भरोसा जताया।
दूसरी ओर कांग्रेस ने पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया को एक बार फिर मैदान में उतारा है, जबकि निर्दलीय नरेश मीणा तीसरे मोर्चे से चुनौती पेश कर रहे हैं। ऐसे में अंता का रण त्रिकोणीय और दिलचस्प बन गया है।
यह सीट कंवरलाल मीणा की 20 साल पुराने प्रकरण में सजा के बाद रिक्त हुई थी। अंता विधानसभा क्षेत्र में करीब 2 लाख 27 हजार से अधिक मतदाता हैं, जिनमें पुरुष और महिला वोटरों की संख्या लगभग बराबर है। हालिया पुनरीक्षण अभियान में 1336 नए मतदाता जुड़े हैं।
पिछले एक वर्ष में राजस्थान की सात सीटों पर उपचुनाव हो चुके हैं, जिनमें से पांच पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है जबकि कांग्रेस केवल एक सीट बचा पाई है। बीजेपी इन नतीजों को राज्य सरकार के कामकाज पर जनता की मुहर बताती रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंता की यह लड़ाई केवल सीट जीतने की नहीं, बल्कि सियासी संदेश देने की जंग भी होगी। मोरपाल सुमन के नाम से बीजेपी ने यह संकेत दिया है कि पार्टी वसुंधरा खेमे के भरोसेमंद चेहरों को फिर से आगे ला रही है और जातीय संतुलन साधने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।
अब देखना यह होगा कि अंता का यह उपचुनाव राजे खेमे की नई ताकत साबित होगा या कांग्रेस के लिए पलटवार का मौका।