HMPV के प्रसार पर निगरानी बढ़ाने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंगलवार को देश में मानव मेटान्यूमो वायरस (HMPV) के प्रसार की स्थिति की समीक्षा की और राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को निगरानी और सतर्कता बढ़ाने के आदेश दिए। यह कदम HMPV संक्रमण को लेकर बढ़ती चिंता के बीच उठाया गया है, हालांकि मंत्रालय ने इसे लेकर कोई गंभीर स्थिति होने की बात नहीं की है।
HMPV की स्थिति पर समीक्षा बैठक: देशभर में निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव की अध्यक्षता में मंगलवार को एक समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें स्वास्थ्य मंत्रालय के विभिन्न अधिकारियों के साथ राज्यों के स्वास्थ्य सचिव और विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस बैठक में HMPV के प्रसार को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सतर्क रहने की सलाह दी गई और कहा गया कि वायरस की रोकथाम के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। बैठक में प्रमुख रूप से श्वसन संबंधी बीमारियों में वृद्धि पर चर्चा की गई और HMPV के संक्रमण की निगरानी को और बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की गई।
HMPV का संक्रमण: सर्दी और वसंत में विशेष रूप से बढ़ता है खतरा
HMPV एक श्वसन वायरस है, जो विशेष रूप से सर्दियों और वसंत के महीनों में फैल सकता है। यह वायरस सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकता है, हालांकि यह आमतौर पर हलका संक्रमण होता है और अधिकांश मामलों में व्यक्ति अपने आप ठीक हो जाता है। HMPV के सामान्य लक्षणों में सर्दी, खांसी, गला खराब होना और बुखार शामिल हैं। मंत्रालय ने राज्यों को यह सलाह दी है कि वे इस वायरस के बारे में आम जनमानस में जागरूकता बढ़ाएं और इसे रोकने के लिए प्रभावी उपायों की जानकारी दें।
स्वास्थ्य मंत्रालय की प्राथमिकता: जागरूकता और बुनियादी उपायों को बढ़ावा देना
बैठक के दौरान, राज्यों को सलाह दी गई कि HMPV के संक्रमण से बचाव के लिए लोगों में जागरूकता फैलाने के प्रयास तेज़ किए जाएं। विशेष रूप से, हाथों की सफाई और खांसी-छींक के दौरान मुँह और नाक को ढकने जैसे सरल लेकिन प्रभावी उपायों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा, लोगों को यह समझाया जाए कि साबुन और पानी से बार-बार हाथ धोना और बिना धुले हाथों से आँख, नाक या मुँह को छूने से बचना एक महत्वपूर्ण तरीका है जिससे वायरस का प्रसार रोका जा सकता है।
HMPV मामलों की स्थिति: वर्तमान में स्थिति स्थिर
बैठक में यह भी बताया गया कि देशभर में श्वसन संबंधी बीमारियों के मामलों में किसी भी प्रकार की असामान्य वृद्धि नहीं देखी जा रही है। आईडीएसपी (इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम) से मिली जानकारी के मुताबिक, HMPV से संबंधित मामलों की संख्या अभी तक नियंत्रण में है और किसी भी राज्य में इस वायरस के प्रकोप की स्थिति नहीं पाई गई है। वर्तमान में देश में HMPV के केवल पांच मामले सामने आए हैं, जिनमें कर्नाटक और तमिलनाडु में दो-दो मामले और गुजरात में एक मामला रिपोर्ट हुआ है।
प्राथमिकताओं में निगरानी और सर्वेक्षण
स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों से अपील की है कि वे निगरानी तंत्र को और मजबूत करें और आईएलआई (इन्फ्लूएंजा-लाइक इलनेस) और एसएआरआई (सीरियस एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस) पर निगरानी को बढ़ाएं। श्रीवास्तव ने कहा कि श्वसन संबंधी बीमारियों में सामान्यतः सर्दियों के दौरान वृद्धि देखी जाती है, लेकिन HMPV को लेकर फिलहाल किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति नहीं है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने यह भी कहा कि देश पूरी तरह से तैयार है और श्वसन संबंधी बीमारियों के मामलों में किसी भी स्थिति से निपटने के लिए जरूरी उपायों को लागू किया जाएगा। यह स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि वर्तमान में कोई गंभीर स्थिति उत्पन्न नहीं हुई है, लेकिन निगरानी को बढ़ाया जाना चाहिए ताकि संक्रमण का कोई भी प्रसार रोका जा सके।
HMPV: क्या है यह वायरस और इससे कैसे बचा जाए?
HMPV एक प्रकार का श्वसन वायरस है जो हवा के माध्यम से फैलता है और मुख्यतः सर्दियों और वसंत में अधिक सक्रिय रहता है। यह वायरस सभी उम्र के लोगों को संक्रमित कर सकता है, लेकिन विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में इसके प्रभाव अधिक होते हैं। आमतौर पर इसका संक्रमण हल्का होता है, और मरीज कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में यह संक्रमण गंभीर भी हो सकता है, जिससे निमोनिया जैसे गंभीर श्वसन रोग हो सकते हैं।
इसके फैलने से बचने के लिए लोगों को हाथ धोने, खांसी-छींक के दौरान मुँह और नाक ढकने और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे बुनियादी उपायों का पालन करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, लोगों को यह समझाने की आवश्यकता है कि वायरस का प्रसार मुख्यतः श्वसन के माध्यम से होता है, इसलिए एक संक्रमित व्यक्ति से दूर रहना और सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनना जरूरी है।
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