Ajit Pawar को BJP ने बताया ‘फडणवीस प्लान’, शिंदे का क्या होगा? Maharashtra के CM कौन?

By Editor
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महाराष्ट्र में सीएम की कुर्सी पर BJP और एकनाथ शिंदे के बीच मची जोर आजमाइश, Ajit Pawar का ‘फडणवीस प्लान’ में रोल

महाराष्ट्र में बीजेपी और एकनाथ शिंदे के बीच मुख्यमंत्री पद की कुर्सी को लेकर फिलहाल तकरार का आखिरी दौर चल रहा है। इस कड़ी में बीजेपी की योजना साफ हो चुकी है, जिसके तहत देवेंद्र फडणवीस को राज्य का मुख्यमंत्री बनाने का मन बनाया जा चुका है। बीजेपी के 132 विधायक विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरे हैं, जो 145 के जादुई आंकड़े से महज 13 विधायक दूर हैं। इस दौरान Ajit Pawar की एनसीपी भी बीजेपी के साथ खड़ी दिखाई देती है, और उनकी 41 विधायकों की ताकत से बीजेपी को मजबूती मिल रही है। ऐसे में, विधानसभा चुनाव के बाद यह साफ नजर आ रहा है कि महाराष्ट्र की सत्ता पूरी तरह से बीजेपी और फडणवीस के पक्ष में झुकी हुई है।

बीजेपी का ‘फडणवीस प्लान’ और Ajit Pawar की भूमिका

बीजेपी ने Ajit Pawar की अगुआई वाली एनसीपी को अपनी रणनीति का हिस्सा बना लिया है और उन्हें फडणवीस के पक्ष में समर्थन देने की योजना बनाई है। सूत्रों के मुताबिक, Ajit Pawar भी अब फडणवीस के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं, और बीजेपी के इस कदम को वे स्वीकृति देने के लिए तैयार हैं। इस बदलाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में खलबली मची हुई है। यदि Ajit Pawar वाकई फडणवीस के पक्ष में आते हैं, तो एकनाथ शिंदे के पास बैकफुट पर जाने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचता।

बीजेपी ने Ajit Pawar को अपनी योजनाओं का हिस्सा बना लिया है और फडणवीस को सीएम बनाने के लिए उन्हें समर्थन देने की पेशकश की है। अब सवाल यह उठता है कि अजित पवार और एकनाथ शिंदे के बीच इस बदलते समीकरण में किसकी राजनीतिक कूटनीति भारी पड़ेगी।

शिंदे के सामने क्या विकल्प हैं?

एकनाथ शिंदे ने मुख्यमंत्री पद को लेकर जो अड़ा हुआ रुख अपनाया है, वह अब मुश्किलों में फंसता हुआ नजर आ रहा है। भाजपा का यह साफ संकेत है कि यदि शिंदे ने पार्टी की मर्जी के खिलाफ कोई कदम उठाया तो उन्हें पीछे हटना ही पड़ेगा। पार्टी नेतृत्व की तरफ से यह भी संकेत दिया जा रहा है कि शिंदे को अगर झुकना पड़ा तो उन्हें डेप्युटी सीएम की पेशकश की जा सकती है। इसके साथ ही Ajit Pawar को भी यही प्रस्ताव दिया जाएगा।

यह पेशकश एक राजनीतिक समझौते के रूप में देखी जा रही है, जिसमें शिंदे और Ajit Pawar को सीएम के बाद दूसरा सबसे बड़ा पद यानी डेप्युटी सीएम मिल सकता है। इसके अलावा, मंत्रालयों के बंटवारे पर भी चर्चा चल रही है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि शिंदे और अजित पवार जल्दी ही दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात कर सकते हैं, जहां इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

बीजेपी और शिंदे के गठबंधन का भविष्य

बीजेपी और शिंदे के बीच फिलहाल असहमति की स्थिति बनी हुई है। शिंदे को बीजेपी के दबाव में आकर किसी समझौते पर हस्ताक्षर करना पड़ेगा, क्योंकि पार्टी 132 सीटों के साथ विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी है और 145 के आंकड़े से सिर्फ 13 विधायक दूर है। ऐसे में, बीजेपी के पास पर्याप्त ताकत है और शिंदे के पास ज्यादा देर तक अपनी स्थिति बनाए रखने का विकल्प नहीं है।

बीजेपी ने Ajit Pawar की एनसीपी को अपनी रणनीति में शामिल करके शिंदे को बैकफुट पर डालने का पूरा प्रयास किया है। अजित पवार की एनसीपी ने अपनी 41 विधायकों की ताकत से बीजेपी को सहारा दिया है और यह कहा जा रहा है कि पार्टी चुनावी परिणामों के बाद फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाने का पूरा मन बना चुकी है।

एकनाथ शिंदे का राजनीतिक दबाव

एकनाथ शिंदे के लिए यह स्थिति काफी मुश्किल हो सकती है, क्योंकि उन्हें बीजेपी के पक्ष में झुकने के अलावा कोई और रास्ता नहीं दिख रहा। हालांकि, वे अब भी खुद को मुख्यमंत्री पद के लिए दावा करने की कोशिशों में लगे हुए हैं, लेकिन बीजेपी की बढ़ती ताकत और अजित पवार के समर्थन से उनके सामने मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।

एकनाथ शिंदे को इस समय अपने दल के नेताओं को संभालने और समझाने का काम भी करना होगा, क्योंकि कई विधायकों के लिए बीजेपी का नेतृत्व आकर्षक हो सकता है। ऐसे में, शिंदे को राजनीतिक तौर पर मजबूरी का सामना करना पड़ सकता है और उन्हें पार्टी के निर्णय के अनुसार ही आगे बढ़ना होगा।

भाजपा की राजनीतिक रणनीति

बीजेपी की रणनीति पूरी तरह से फडणवीस को मुख्यमंत्री बनाने पर केंद्रित है। पार्टी ने यह कदम काफी सोच-समझ कर उठाया है, और अब शिंदे और अजित पवार को साथ लाकर राजनीतिक माहौल को अपने पक्ष में करने की कोशिश की जा रही है। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, शिंदे और अजित पवार दोनों को डेप्युटी सीएम की पेशकश की जाएगी, ताकि उनका समर्थन हासिल किया जा सके और महाराष्ट्र में स्थिर सरकार बनाई जा सके।

नतीजा क्या होगा?

महाराष्ट्र के इस राजनीतिक घटनाक्रम में यह तय करना बाकी है कि आखिरकार किसका पलड़ा भारी पड़ेगा। हालांकि, बीजेपी और फडणवीस के पक्ष में स्थितियां अधिक मजबूत नजर आ रही हैं, लेकिन शिंदे और अजित पवार के फैसले से समीकरण बदल सकते हैं। दिल्ली में अमित शाह के साथ संभावित मुलाकात के बाद इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा, जो यह तय करेगा कि महाराष्ट्र की सत्ता किसके हाथ में होगी।

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