America ने पाकिस्तान पर मिसाइल प्रोग्राम पर कठोर प्रतिबंध लगाया है और कई कंपनियों को जुर्माना भी लगाया है, जिससे पाकिस्तान भड़क गया है। पाकिस्तान का आरोप है कि अमेरिका एक पक्षीय रवैया अपनाकर उसे निशाना बना रहा है, और बिना किसी ठोस सबूत के उसे टारगेट कर रहा है। यह कदम पाकिस्तान द्वारा विकसित किए जा रहे मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर उठाया गया है, जिनमें पाकिस्तानी रक्षा संस्थाओं की कई प्रमुख कंपनियां शामिल हैं।
पाकिस्तान का आरोप
पाकिस्तान ने अमेरिका के इस कदम को नाइंसाफी और भेदभावपूर्ण करार दिया है, जिसमें अमेरिकी सरकार ने पाकिस्तान के मिसाइल प्रोग्राम पर प्रतिबंध लगाए हैं और उसकी प्रमुख कंपनियों पर जुर्माना लगाया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका का यह एकतरफा निर्णय क्षेत्रीय स्थिरता और शांति के लिए खतरे का कारण बन सकता है।
पाकिस्तान का आरोप है कि अमेरिका ने बिना किसी ठोस और पुख्ता सबूत के उसके हथियार कारोबार को निशाना बनाया है। इसके अलावा, पाकिस्तान ने यह भी दावा किया कि अमेरिका अपनी सैन्य तकनीक की बिक्री में दोहरा रवैया अपना रहा है, क्योंकि वह अन्य देशों को सैन्य उपकरणों के लाइसेंस देने में कोई झिझक नहीं दिखाता, लेकिन पाकिस्तान के मामले में यह भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जाता है।
पाकिस्तान का कहना है कि इस प्रतिबंध से उसकी सुरक्षा और रक्षा क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि वह अपनी मिसाइलों के विकास में लगातार अग्रसर है। पाकिस्तानी अधिकारियों का यह भी कहना है कि अमेरिका के इस कदम से वैश्विक सुरक्षा में असंतुलन आ सकता है, क्योंकि इस तरह के एकतरफा फैसले से क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
America के प्रतिबंध और कंपनियों पर असर
America ने पाकिस्तान की चार प्रमुख कंपनियों पर बैन लगा दिया है, जिनमें एयरोस्पेस और डिफेंस एजेंसी (एनडीसी), नेशनल डिवेलपमेंट कॉम्प्लेक्स, एफिलिएट्स इंटरनेशनल, और ख्तर एंड संस प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। इन कंपनियों पर यह बैन पाकिस्तान के मिसाइल प्रोग्राम के कारण लगाया गया है, जिसमें पाकिस्तान अपनी लंबी दूरी की मिसाइलों को विकसित कर रहा था। इनमें शाहीन बैलिस्टिक मिसाइल भी शामिल है।
America का कहना है कि पाकिस्तान अपनी मिसाइलों को न सिर्फ दक्षिण एशिया में, बल्कि उससे बाहर भी इस्तेमाल करने की योजना बना रहा था। यह स्थिति अमेरिका के लिए खतरनाक हो सकती है, क्योंकि पाकिस्तान के पास अब परमाणु हथियार भी हैं, और उनकी मिसाइल तकनीक के दायरे में अब एशिया से बाहर की दुनिया भी आ सकती है।
पाकिस्तान की परमाणु शक्ति
पाकिस्तान ने 1998 में खुद को परमाणु शक्ति संपन्न देश घोषित किया था। तब से लेकर अब तक, पाकिस्तान ने अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत किया है, विशेष रूप से बैलिस्टिक मिसाइलों के क्षेत्र में। पाकिस्तान के इन कदमों से दुनिया भर में चिंता का माहौल बना हुआ है, क्योंकि उसके पास परमाणु हथियार हैं और इनका दुरुपयोग एशिया के बाहर के देशों तक हो सकता है।
America ने चीन की कंपनियों पर भी इसी तरह के प्रतिबंध लगाए थे, जिससे यह स्पष्ट है कि वाइट हाउस पाकिस्तान के सैन्य विकास को लेकर गंभीर है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अगर पाकिस्तान ने अपनी मिसाइल क्षमता को और बढ़ाया, तो वह भविष्य में एशिया के बाहर तक भी हमले कर सकता है।
पाकिस्तान के जवाब में अमेरिका की स्थिति
America ने कहा कि पाकिस्तान की तरफ से हो रही इस तरह की गतिविधियों से ना केवल क्षेत्रीय, बल्कि वैश्विक सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा रहा है। वाइट हाउस के अधिकारी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान द्वारा मिसाइलों का विकास न केवल दक्षिण एशिया के देशों के लिए, बल्कि दुनिया के बाकी देशों के लिए भी चिंताजनक हो सकता है।
America का कहना है कि पाकिस्तान की आक्रामक मिसाइल नीति से क्षेत्र में और विश्व स्तर पर अस्थिरता फैल सकती है। America का यह कदम इस बात का संकेत है कि वह पाकिस्तान के सैन्य कार्यक्रमों पर कड़ी निगरानी रखे हुए है और किसी भी प्रकार के खतरे को गंभीरता से ले रहा है।
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