दौसा। अरावली बचाने की मुहिम अब सिर्फ पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रह गई है। शनिवार को दौसा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित पैदल मार्च इस अभियान के दौरान विवादों में घिर गया। कांग्रेस कार्यकर्ता नेहरू गार्डन से गांधी तिराहे तक पैदल मार्च निकालकर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद सभी कार्यकर्ता डाक बंगले पहुंचे, लेकिन यहां उन्हें मीटिंग हॉल बंद और कोई प्रशासनिक व्यवस्था न मिलने से निराशा हुई।
सांसद मुरारी लाल मीणा ने तुरंत संबंधित अधिकारियों को फोन कर व्यवस्था कराने का प्रयास किया, लेकिन कोई इंतजाम नहीं हुआ। इससे युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई। कुछ कार्यकर्ताओं ने ताले तोड़ने का प्रयास किया, किसी ने ठोकरें मारी, तो एक कार्यकर्ता पत्थर लेकर भी पहुंच गया। स्थिति बिगड़ती देख कांग्रेस जिलाध्यक्ष रामजीलाल ओड़ और सांसद मुरारी लाल मीणा ने कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखने की अपील की, जिसके बाद मामला शांत हुआ। वहीं कांग्रेस विधायक डीसी बैरवा ने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताया और संबंधित स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए। दौसा विधायक दीनदयाल बैरवा ने कहा कि “कांग्रेस जिस तरह से सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है, वह पूरी तरह गलत है। विरोध के नाम पर कानून हाथ में लेना स्वीकार्य नहीं है।”इस बीच राजस्थान सरकार में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने भी सख्त बयान दिया। उन्होंने कहा कि मोदी जी के चित्र फाड़ने जैसे कृत्य निंदनीय हैं और भविष्य में ऐसा कोई प्रयास हुआ, तो नहले का जवाब दहले से दिया जाएगा। किरोड़ी लाल मीणा ने आरोप लगाया कि चुनाव हारने के बाद कई नेता जनता के बीच दिखाई तक नहीं देते, लेकिन जो व्यक्ति जनता की बात सरकार तक पहुंचाता है, उस पर आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
कुल मिलाकर, अरावली बचाओ आंदोलन के दौरान हुई अव्यवस्था अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल चुकी है। सवाल यही है कि पर्यावरण बचाने की यह मुहिम सियासी टकराव की भेंट न चढ़ जाए।