उत्तर प्रदेश के 24 जिलों के 913 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। लगभग 83 हजार लोग इस आपदा से प्रभावित हैं, जिनमें से 19 हजार से अधिक लोग राहत शिविरों में शरण लिए हुए हैं। राहत आयुक्त भानु चंद्र गोस्वामी ने बताया कि दो लाख से ज्यादा लोगों को राहत सामग्री दी गई है।
सबसे ज़्यादा प्रभावित जिलों में बिजनोर, बहराईच, गोंडा, गोरखपुर, कासगंज, भदोही, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, आगरा, औरैया, चित्रकूट, बलिया, बांदा, गाजीपुर, मिर्जापुर, प्रयागराज, वाराणसी, चंदौली, जालौन, कानपुर देहात, हमीरपुर, इटावा और फतेहपुर शामिल हैं।
अब तक 517 मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं और 360 लोगों को आर्थिक सहायता दी गई है। करीब 33 हजार हेक्टेयर ज़मीन जलमग्न हो चुकी है। राहत वितरण के लिए 1,640 नावें और मोटरबोट तैनात की गई हैं। अब तक लगभग 17,924 खाने के पैकेट और 2,47,277 लंच पैकेट बांटे जा चुके हैं। 40 से ज्यादा सामुदायिक रसोइयों में प्रभावित लोगों को खाना परोसा जा रहा है।
मंगलवार सुबह तक बीते 24 घंटों में राज्य में 22.7 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य औसत 6.4 मिमी होता है। यह सामान्य से 255 प्रतिशत अधिक है। एक जून से अब तक 424.4 मिमी बारिश हो चुकी है, जो सामान्य से 8 प्रतिशत अधिक है। बीते 24 घंटों में बारिश की तीव्रता में कुछ कमी दर्ज की गई है।
महाराजगंज में सबसे अधिक 40.5 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 650 प्रतिशत ज्यादा रही। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर में सामान्य 8.4 मिमी की तुलना में 174.3 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य से 1,975 प्रतिशत अधिक है।
बचाव कार्यों की निगरानी के लिए 11 मंत्रियों की टीम बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा कर रही है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने प्रयागराज का हवाई सर्वे किया और राहत शिविर में जाकर पीड़ितों से मुलाकात की। उन्होंने अधिकारियों को जरूरी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने भदोही में प्रभावित इलाकों का दौरा कर राहत सामग्री वितरित की और मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि दी। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और विधायक नीलकंठ तिवारी ने वाराणसी के राहत शिविर में जाकर लोगों से संवाद किया और मदद का भरोसा दिलाया। उद्योग मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने मिर्जापुर में समीक्षा बैठक कर राहत व बचाव कार्यों का जायजा लिया।