महाराष्ट्र में GBS का कहर: पुणे में एक मौत, 127 संदिग्ध मरीज, 20 वेंटिलेटर पर
महाराष्ट्र में गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) ने तांडव मचाना शुरू कर दिया है। इस बीमारी का प्रभाव नागपुर के बाद पुणे में भी दिखाई देने लगा है। पुणे के ससून हॉस्पिटल में 56 साल की एक महिला की इस गंभीर बीमारी के चलते मौत हो गई। इससे पहले सोलापुर में भी एक 40 वर्षीय व्यक्ति की इस बीमारी से जान चली गई थी। हेल्थ डिपार्टमेंट के मुताबिक, पुणे और आसपास के क्षेत्रों में इस बीमारी के 127 संदिग्ध मामलों की पहचान की गई है, जिनमें से 72 मामलों में GBS की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से नौ मरीज पुणे जिले के बाहर के हैं, जिससे बीमारी के संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ गया है।
महाराष्ट्र में GBS के बढ़ते मामले: स्वास्थ्य विभाग की बढ़ी चिंता
GBS एक दुर्लभ लेकिन खतरनाक बीमारी है, जो बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण के कारण होती है। इस बीमारी में मरीज की इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है और शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, साथ ही शरीर में सुन्नापन महसूस होता है। पुणे में हाल ही में एक महिला की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए त्वरित कदम उठाए हैं। हालांकि, इस महिला को पहले से कई अन्य बीमारियां थीं, फिर भी इस बीमारी के तेजी से फैलने की आशंका से स्वास्थ्य विभाग चिंतित है।
साथ ही, इस बीमारी से प्रभावित 20 मरीजों को वेंटिलेटर पर रखा गया है, जिनकी हालत बेहद गंभीर बनी हुई है। बुधवार को 16 नए मामले सामने आए हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी हो गई हैं। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इस संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन दूसरी जगहों से आए मरीजों के कारण इसका प्रसार और तेजी से हो सकता है।
मल और पानी के नमूनों की जांच, संक्रमण का पता लगाने के प्रयास
हेल्थ डिपार्टमेंट ने इस बढ़ते संक्रमण के कारणों का पता लगाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। पुणे के मल के 121 सैंपल राष्ट्रीय वायरोलॉजी संस्थान (NIV) भेजे गए थे, जिनकी जांच की गई। जांच में 21 सैंपल नोरोवायरस के लिए पॉजिटिव पाए गए, जबकि 5 सैंपल कैम्पिलोबैक्टर बैक्टीरिया के लिए पॉजिटिव पाए गए। दोनों ही वायरस पेट की समस्याओं का कारण बनते हैं। इस तरह के वायरसों के चलते पेट से जुड़ी बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं, जो GBS जैसी गंभीर बीमारी के कारणों में शामिल हो सकती हैं।
इसके अलावा, पुणे के अलग-अलग इलाकों से पानी के 144 सैंपल जांच के लिए पब्लिक हेल्थ लेबोरेटरी भेजे गए थे। इस जांच में आठ जल स्रोतों के नमूने दूषित पाए गए हैं। यह दूषित पानी पीने से पेट संबंधी बीमारियां फैल सकती हैं, जो फिर GBS के संक्रमण का कारण बन सकती हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इन जल स्रोतों को तत्काल बंद करने के आदेश दिए हैं और लोगों को इन स्रोतों से पानी न पीने की सलाह दी है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए कदम और सतर्कता
स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कदम उठाए हैं। पुणे में GBS से प्रभावित 127 संदिग्ध मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कई की हालत नाजुक बनी हुई है। इसके अलावा, विभिन्न क्षेत्रों में जल स्रोतों की निगरानी बढ़ा दी गई है और दूषित पानी को फिल्टर करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। हेल्थ डिपार्टमेंट ने लोगों को साफ पानी पीने और शुद्ध आहार लेने की सलाह दी है। इसके अलावा, स्वच्छता बनाए रखने के लिए लोगों को सख्त चेतावनी दी गई है ताकि बीमारी के फैलाव को रोका जा सके।
GBS के लक्षण और बचाव के उपाय
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर के नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचता है। इस बीमारी के लक्षणों में शरीर में सुन्नपन, मांसपेशियों की कमजोरी, चलने में परेशानी, सांस लेने में कठिनाई और पैरालिसिस जैसी समस्याएं शामिल हैं। यह बीमारी अक्सर बैक्टीरियल और वायरल संक्रमण के कारण होती है। डॉक्टरों का कहना है कि GBS के लक्षणों की पहचान होते ही तुरंत इलाज कराना आवश्यक होता है, क्योंकि समय रहते इलाज न मिलने पर यह स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।
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