अन्नराज ने बताए पंच परिवर्तन — कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और स्वदेशी भाव पर दिया जोर
पादूकलां: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी वर्ष के अवसर पर गुरुवार को पादूखुर्द में विजयादशमी उत्सव एवं पथ संचलन का भव्य आयोजन हुआ। स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में शामिल हुए और अनुशासन, संगठन तथा राष्ट्रभावना का अद्भुत प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अन्नराज, प्रांत मुख्य मार्ग कार्य प्रमुख, ने संघ के 100 वर्षों के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए “पंच परिवर्तन” की अवधारणा प्रस्तुत की — कुटुंब प्रबोधन, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और स्वदेशी भाव। उन्होंने कहा कि परिवार में संवाद और संस्कार से समाज की एकता मजबूत होती है, जबकि स्वदेशी भाव आत्मनिर्भर भारत की दिशा तय करता है।
अन्नराज ने कहा कि संघ केवल संगठन नहीं, बल्कि समाज निर्माण की जीवंत शक्ति है। स्वयंसेवक अपने कर्म, अनुशासन और संस्कारों से राष्ट्र की सेवा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
पथ संचलन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मैदान से शुरू होकर मुख्य मार्गों से होकर गुजरा, जिसमें युवाओं और बाल स्वयंसेवकों की बड़ी भागीदारी रही। कार्यक्रम में पारंपरिक शस्त्र पूजन भी किया गया, जहां स्वयंसेवकों ने शस्त्रों को राष्ट्र और धर्म रक्षा का प्रतीक मानकर वंदन किया।