सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम भेजने के पिछले आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के दौरान अधिकारियों पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने सवाल किया कि कई क्षेत्रों में अधिकारी आदेश के सार्वजनिक होने से पहले ही कुत्तों को उठाना क्यों शुरू कर दिए।
अदालत के सामने दिल्ली सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बच्चों पर कुत्तों के हमले बढ़ रहे हैं, जिससे चोट और रेबीज से मौतें हो रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल 37 लाख कुत्ता काटने के मामले दर्ज हुए। उन्होंने कहा, “कुत्तों को मारने की जरूरत नहीं है, उन्हें अलग किया जाना चाहिए।”
वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने जानवरों के कल्याण संगठन की ओर से कहा कि शेल्टर होम नहीं हैं, इसलिए आदेश लागू नहीं हो सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि “कुत्तों को उठाया जाएगा, उनके लिए शेल्टर नहीं हैं, वे एक-दूसरे पर हमला कर सकते हैं। यह गंभीर समस्या पैदा करेगा।”
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों पर फटकार लगाते हुए कहा कि संसद नियम बनाती है, लेकिन उनका पालन नहीं होता। अदालत ने सभी पक्षों की दलीलों को सुना और अपने आदेश को सुरक्षित रख लिया।