टीना डाबी और रिया डाबी : राजस्थान में जल संरक्षण अवॉर्ड को लेकर विवाद

By admin
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देशभर में जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए हाल ही में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चयनित जिलों को अवॉर्ड देकर सम्मानित किया। लेकिन इस सम्मान के बाद राजस्थान के दो जिलों—बाड़मेर और उदयपुर—में विवाद खड़ा हो गया है। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इन दोनों जिलों से सम्मानित अधिकारी चर्चित IAS बहनें टीना डाबी और रिया डाबी हैं।

टीना डाबी पर गलत आंकड़े और फोटो अपलोड करने के आरोप

बाड़मेर की जिला कलेक्टर टीना डाबी को जल संचयन श्रेणी में पहला पुरस्कार मिला, जिसके तहत 2 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई। हालांकि, कुछ जनप्रतिनिधियों, जिनमें सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल भी शामिल हैं, ने आरोप लगाया कि अवॉर्ड हासिल करने के लिए पोर्टल पर गलत आंकड़े और डुप्लीकेट तस्वीरें अपलोड की गईं।

इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर भी काफी विवाद देखने को मिला। इसके बाद टीना डाबी ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि पोर्टल पर अपलोड की गई सभी तस्वीरें और आंकड़े ब्लॉक और जिला स्तर पर पूरी तरह वेरीफिकेशन के बाद ही भेजे गए थे। टीना डाबी का कहना है कि उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।

रिया डाबी को मिले अवॉर्ड पर भी उठा विवाद

दूसरी ओर, उदयपुर जिले में, जहां रिया डाबी CEO के पद पर कार्यरत हैं, वहां दूसरे पुरस्कार के रूप में 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिली। इस अवॉर्ड के बाद भी सवाल खड़े हुए। आरोप लगा कि जल संचयन अभियान के पोर्टल पर गलती से एक शादी का कार्ड अपलोड कर दिया गया।

इस मामले पर उदयपुर कलेक्टर ने सफाई देते हुए बताया कि यह गलती ग्राम पंचायत के एक कनिष्ठ अभियंता से अनजाने में हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस त्रुटि का अवॉर्ड प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं है। साथ ही, जिम्मेदार अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।

अवॉर्ड पर उठे सवालों से बढ़ा सियासी विवाद

बाड़मेर और उदयपुर, दोनों जिलों को मिले अवॉर्ड को लेकर उठा विवाद अब सियासी रंग लेता नजर आ रहा है, खासतौर पर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल के शामिल होने के बाद। जहां बाड़मेर को 2 करोड़ रुपये और उदयपुर को 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि मिली, वहीं डाबी बहनों पर लगे आरोपों के चलते जल संरक्षण परियोजनाओं की पारदर्शिता को लेकर बहस तेज हो गई है।

फिलहाल यह मामला राजस्थान में प्रशासनिक कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और राजनीति—तीनों को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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