Rising Rajasthan समिट की तैयारियों में निगम ने छिपाए असली हालात: कच्ची बस्तियां और गंदगी पर पर्दा

By Editor
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Rising Rajasthan इंवेस्टमेंट समिट: शहर की गंदगी पर पर्दा डालने की कोशिश, असलियत छुपा रहे निगम अधिकारी

जयपुर, राजस्थान – राजधानी जयपुर में होने जा रही Rising Rajasthan इंवेस्टमेंट समिट को लेकर सरकार और नगर निगम द्वारा शहर को सुंदर और साफ दिखाने के लिए कई कदम उठाने की बात की जा रही थी, लेकिन हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। मुख्यमंत्री और शहरी विकास मंत्री ने समिट के पहले शहर की स्वच्छता और सुंदरता पर खास ध्यान देने के सख्त निर्देश दिए थे ताकि निवेशकों के सामने जयपुर की बेहतरीन छवि पेश की जा सके। लेकिन निगम अधिकारियों ने इस निर्देश को गंभीरता से नहीं लिया, और शहर में गंदगी को छुपाने के लिए सफेद और हरे पर्दे का सहारा लिया।

कचरे और अधूरे निर्माणों पर पर्दा डालने की कोशिश

समिट के आयोजन से कुछ दिन पहले शहर में सफाई व्यवस्था की हालत बहुत खराब है, खासकर उन इलाकों में जहां से प्रमुख निवेशक गुजरने वाले हैं। मालवीय नगर, जगतपुरा, सांगानेर और मानसरोवर जैसे प्रमुख क्षेत्र, जो राइजिंग राजस्थान समिट के लिए खासतौर पर तैयार किए जा रहे थे, इन इलाकों में गंदगी और कचरे का ढेर लगा हुआ है। सड़क के दोनों किनारे कचरे के ढेर दिखाई दे रहे हैं, वहीं कई ओपन डिपो भी कचरे से भरे पड़े हैं, जो अब तक साफ नहीं किए गए हैं।

अधिकारियों द्वारा इन समस्याओं को ढंकने के लिए शहर के प्रमुख स्थानों पर सफेद और हरे रंग के पर्दे लगाए गए हैं। इनमें से कुछ इलाकों में तो कचरे और गंदगी को छुपाने के लिए बल्लियां भी लगाई गई हैं। यह पर्दे और बैरिकेड्स इस उद्देश्य के लिए लगाए गए हैं ताकि समिट के दौरान निवेशकों और पर्यटकों को इन समस्याओं का सामना न करना पड़े और शहर की गंदगी से उनकी छवि प्रभावित न हो।

Rising Rajasthan समिट के रास्तों पर गंदगी और कचरे के ढेर

जहां एक ओर Rising Rajasthan समिट के लिए सैकड़ों निवेशक और पर्यटक आने की संभावना जताई जा रही है, वहीं दूसरी ओर इन निवेशकों के लिए जिन रास्तों से होकर गुजरना होगा, वे बहुत ही खराब हालत में हैं। ग्रेटर निगम के तहत आने वाले कई आरओबी (रूफ ओवर ब्रिज) और फ्लाईओवर के नीचे गंदगी फैली हुई है, और यह पूरी तरह से शहर की छवि को खराब कर रही है। खासकर वह इलाके जहां से निवेशक एंट्री करेंगे, जैसे गौरव टावर पुलिया, मयूर पार्क, गोनेर रोड, इंदिरा गांधी नगर, और सिविल लाइंस जैसे प्रमुख मार्गों पर गंदगी और टूटे मकानों का अंबार है।

इन स्थानों को निवेशकों और मीडिया से छुपाने के लिए निगम ने इन रास्तों पर बड़े पर्दे लगाए हैं, जिससे कि गंदगी, कचरा और टूटी दीवारें नजर न आएं। इन पर्दों की मदद से निगम यह प्रयास कर रहा है कि समिट के दौरान किसी भी तरह से शहर की गंदी छवि सामने न आए।

यूडीएच सचिव के निरीक्षण के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं

Rising Rajasthan: शहरी विकास विभाग (यूडीएच) के सचिव राजेश यादव ने खुद शहर का दौरा किया था और समिट से पहले इन समस्याओं को हल करने के लिए कई निर्देश दिए थे। वे दो बार शहर का निरीक्षण कर चुके हैं, लेकिन स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ। इसके बावजूद निगम की ओर से इस बारे में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। यह स्थिति यह दर्शाती है कि निगम समिट के आयोजकों के दबाव में आकर केवल सौंदर्यीकरण की ओर ध्यान दे रहा है, जबकि असल समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।

मीडिया और सार्वजनिक स्थानों पर पर्दे लगाने का प्रयास

Rising Rajasthan: सिविल लाइंस फाटक, डीएलबी मुख्यालय के पास, जहां यूडीएच सचिव का कार्यालय है, वहां भी गंदगी को ढंकने के लिए पर्दे लगाए गए हैं। इसके अलावा, बालाजी मोड़ और जगतपुरा रोड पर भी टूटे मकानों को छुपाने के लिए पर्दे लगाए गए हैं। यह पर्दे इसलिए लगाए गए हैं ताकि निवेशक और पर्यटक इन समस्याओं से अनजान रहें और समिट के दौरान किसी भी तरह की नकारात्मक छवि न बने।

समिट की तैयारियों में निगम की लापरवाही

Rising Rajasthan समिट के आयोजन के मौके पर इस तरह की छिपी हुई गंदगी और अव्यवस्था से यह साफ नजर आता है कि निगम ने समिट की तैयारियों में केवल दिखावे की ओर ध्यान दिया है, न कि असली समस्याओं को हल करने पर। कचरे की समस्या, टूटी सड़कों, और अधूरे निर्माणों को छुपाने की कोशिश की जा रही है, जबकि असल में इन समस्याओं का समाधान करना जरूरी था।

Rising Rajasthan समिट में निवेशकों के आने से पहले निगम को चाहिए था कि वह शहर की वास्तविक स्थिति सुधारता और निवेशकों को एक साफ-सुथरी और व्यवस्थित शहर की छवि प्रस्तुत करता, लेकिन यह कोशिश केवल पर्दे डालने तक सीमित रही है।

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