केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों पर जोरदार पलटवार किया। राहुल गांधी ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) पर निशाना साधते हुए कहा था कि मोदी सरकार की नीतियों ने बैंकिंग क्षेत्र को कमजोर किया है। इस पर सीतारमण ने कहा कि राहुल गांधी के बयान पूरी तरह से निराधार थे और वे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों, उनके संघर्ष और देश के मजबूत बैंकिंग सिस्टम का अपमान करने वाले थे।
वित्त मंत्री ने कांग्रेस शासन के दौरान बैंकों के संचालन के बारे में गंभीर आरोप लगाए और राहुल गांधी के आरोपों को तथ्यहीन और आधारहीन बताया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मोदी सरकार ने पब्लिक सेक्टर बैंकों के क्षेत्र में सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की, जिनका उद्देश्य बैंकों की सेहत को सुधारना और देश के नागरिकों को बेहतर सेवा प्रदान करना था।
राहुल गांधी का आरोप और Nirmala Sitharaman का जवाब
राहुल गांधी ने हाल ही में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) पर आरोप लगाते हुए कहा था कि बैंकिंग क्षेत्र में भारी संकट है और सरकार की नीतियों के कारण बैंकों की स्थिति कमजोर हो गई है। इस पर वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने पलटवार करते हुए कहा, “राहुल गांधी के बयान पूरी तरह से निराधार और तथ्यहीन हैं।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस के UPA शासन के दौरान कुछ विशेष लोगों को बैंकों से मनमाने तरीके से लोन दिया जाता था, और सार्वजनिक बैंकों का उपयोग “एटीएम” की तरह किया जाता था।
Nirmala Sitharaman ने कहा, “क्या विपक्ष के नेता राहुल गांधी से मिलने वाले लोगों ने उन्हें नहीं बताया कि कांग्रेस के शासन में बैंकों को विशेष मित्रों के लाभ के लिए इस्तेमाल किया गया था? क्या राहुल गांधी को यह नहीं बताया गया कि UPA शासन के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में ‘फोन बैंकिंग’ का चलन था, जिसमें बैंकों के कर्मचारियों को डराकर अपने चहेतों को मनमाने लोन दिए जाते थे?”
UPA शासन में “फ़ोन बैंकिंग” और कॉरपोरेट क्रेडिट के केंद्रीकरण पर आरोप
Nirmala Sitharaman ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि UPA शासन के दौरान कॉरपोरेट क्रेडिट का अत्यधिक केंद्रीकरण और अंधाधुंध ऋण वितरण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की सेहत को बिगाड़ दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि सार्वजनिक बैंकों को कांग्रेस सरकार के उच्चतम नेताओं के करीबी दोस्तों के लिए ‘एटीएम’ की तरह इस्तेमाल किया जाता था।
उन्होंने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि मोदी सरकार के तहत बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों को लागू किया गया, जिससे बैंकों की सेहत में सुधार हुआ और सरकारी बैंकों के कार्यों में पारदर्शिता आई। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार ने 2015 में ‘एसेट क्वालिटी रिव्यू’ शुरू किया, जिसने UPA सरकार के समय के ‘फोन बैंकिंग’ घोटाले और काले कारनामों को उजागर किया।”
4R रणनीति और बैंकिंग क्षेत्र में सुधार
Nirmala Sitharaman ने आगे कहा कि मोदी सरकार ने पब्लिक सेक्टर बैंकों की स्थिति को सुधारने के लिए ‘4R’ रणनीति को अपनाया, जिसे रेजॉल्यूशन, रीकैपिटलाइजेशन, रिफॉर्म और रीफॉर्म्स के तौर पर जाना जाता है। इस रणनीति के तहत सरकारी बैंकों में आवश्यक पूंजी निवेश किया गया, उनकी कार्यप्रणाली में सुधार किया गया और उनके लिए जोखिम प्रबंधन प्रणाली को मजबूत किया गया।
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बैंकिंग क्षेत्र में अभूतपूर्व सुधार किए गए हैं, जो कि बैंकिंग प्रणाली को और मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मोदी सरकार ने सार्वजनिक बैंकों के कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित और पारदर्शी कार्य वातावरण बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है, जिससे नागरिकों को बेहतर सेवा मिल सके।
Nirmala Sitharaman का सवाल: क्या राहुल गांधी को नहीं बताया गया?
Nirmala Sitharaman ने सवाल करते हुए कहा, “क्या राहुल गांधी को यह नहीं बताया गया कि UPA शासन के दौरान सार्वजनिक बैंकों को चहेते लोगों के लिए ATM की तरह इस्तेमाल किया जाता था? क्या उन्हें यह नहीं बताया गया कि हमारी सरकार ने बैंकिंग क्षेत्र में सुधारों को लागू किया, ताकि इस तरह के काले कारनामों से बचा जा सके?”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के समय, बैंक कर्मचारियों को डराकर, ‘फोन बैंकिंग’ के जरिए बैंकों से मनमाने लोन देने पर मजबूर किया जाता था। मोदी सरकार ने इस घोटाले को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाए, जिनमें ‘एसेट क्वालिटी रिव्यू’ की शुरुआत और बैंकों में सुधारों की प्रक्रिया शामिल थी।
बैंकिंग क्षेत्र में मोदी सरकार की उपलब्धियाँ
Nirmala Sitharaman ने अपने बयान में मोदी सरकार द्वारा किए गए सुधारों की सूची दी, जिसमें बैंकों के पुनर्पूंजीकरण और कार्यप्रणाली में सुधार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी बैंकों के लिए ‘एसेट क्वालिटी रिव्यू’ एक महत्वपूर्ण कदम था, जो UPA सरकार की ‘फोन बैंकिंग’ की काली करतूतों को उजागर करने में सफल रहा।
इसके अलावा, मोदी सरकार ने बैंकों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी बनाने और उनके संचालन में सुधार के लिए कई कदम उठाए, जिनसे देश में बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने बताया कि बैंकों को ऋण वितरण में पारदर्शिता और उचित मानदंडों के तहत काम करने के लिए प्रेरित किया गया है।
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