Amit Shah के आंबेडकर पर बयान को लेकर उठे विवाद की जानें पूरी कहानी

By Editor
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Amit Shah

Amit Shah के भाषण पर आंबेडकर को लेकर उठे विवाद की पूरी कहानी

केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah के हालिया भाषण में डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद खड़ा हो गया है। Amit Shah ने अपने भाषण के दौरान कहा था कि आजकल डॉ. आंबेडकर का नाम लेना एक “फ़ैशन” बन गया है, जो कांग्रेस पार्टी सहित कई राजनीतिक दलों और नेताओं के निशाने पर आ गया है। Amit Shah ने कहा, “अब ये एक फ़ैशन हो गया है। आंबेडकर, आंबेडकर, आंबेडकर… इतना नाम अगर भगवान का लेते तो सात जन्मों तक स्वर्ग मिल जाता।” उनके इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया हुई है, खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा इस पर आपत्ति जताई गई है।

Amit Shah का बयान और विवाद

Amit Shah का यह बयान उस वक्त सामने आया जब वे डॉ. आंबेडकर की विरासत पर बोल रहे थे। उन्होंने आंबेडकर के संघर्षों का जिक्र करते हुए बताया कि डॉ. आंबेडकर ने पहली भारतीय कैबिनेट से इस्तीफा क्यों दिया था। शाह ने यह भी कहा कि आंबेडकर को सरकार की विदेश नीति, अनुच्छेद 370 और अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों के साथ होने वाले भेदभाव के चलते असंतोष था, जिसके कारण उन्होंने इस्तीफा दिया था। शाह ने यह भी सवाल उठाया कि जब लोग आंबेडकर का नाम लेते हैं तो उनके प्रति वास्तविक भावना क्या है, यह महत्वपूर्ण है।

Amit Shah ने यह भी कहा कि अगर लोग आंबेडकर के नाम का उपयोग वोटों के लिए करते हैं, तो क्या यह सही है? इस बयान के बाद शाह पर आंबेडकर के अपमान का आरोप लगाया गया। उनकी टिप्पणी पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। खड़गे ने कहा कि गृह मंत्री ने सदन में बाबा साहेब का अपमान किया है और इससे यह सिद्ध हो गया है कि बीजेपी और संघ परिवार तिरंगे और भारतीय संविधान के खिलाफ हैं।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने ट्वीट किया, “गृह मंत्री Amit Shah ने जो आज भरे सदन में बाबा साहेब का अपमान किया है, उससे फिर एक बार सिद्ध हो गया है कि बीजेपी/RSS तिरंगे के खिलाफ़ थे। उनके पुरखों ने अशोक चक्र का विरोध किया, संघ परिवार के लोग पहले दिन से भारत के संविधान के बजाय मनुस्मृति को लागू करना चाहते थे।” खड़गे ने कहा कि आंबेडकर का विरोध करने वाले लोगों को आज आंबेडकर का नाम लेने का कोई हक नहीं है।

कांग्रेस पार्टी ने इसे आंबेडकर के प्रति भाजपा की घृणा के रूप में देखा और आरोप लगाया कि पार्टी डॉ. आंबेडकर की विरासत का राजनीतिक लाभ उठाती है, जबकि वास्तविकता में उनके विचारों का पालन नहीं करती।

डॉ. आंबेडकर की भूमिका

डॉ. भीमराव आंबेडकर न केवल भारतीय संविधान के निर्माता थे, बल्कि वे दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले नेता भी थे। उनके द्वारा किए गए योगदान को नकारा नहीं जा सकता। आंबेडकर ने समाज में व्याप्त जातिवाद और असमानताओं के खिलाफ आवाज उठाई और भारतीय समाज को एक सशक्त दिशा देने का प्रयास किया। उनका मानना था कि भारतीय समाज को समानता और न्याय पर आधारित होना चाहिए, और इसके लिए उन्होंने अपने जीवनभर संघर्ष किया।

डॉ. आंबेडकर का भारत के संविधान में योगदान अनमोल है, और उन्होंने संविधान में सुनिश्चित किया कि समाज के कमजोर वर्गों को उचित अधिकार मिलें। उनके संघर्ष और विचार आज भी लाखों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं।

क्या था शाह का मकसद?

Amit Shah ने जिस संदर्भ में यह बयान दिया, वह दरअसल आंबेडकर के राजनीतिक विचारों पर था। उन्होंने यह बताने की कोशिश की कि आंबेडकर ने अपनी असहमति के कारण कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। उनका यह बयान कांग्रेस द्वारा आंबेडकर का नाम लेकर चुनावी राजनीति करने के खिलाफ था। शाह का यह कहना था कि आंबेडकर का नाम लेना वोट बैंक के लिए किया जा रहा है, जबकि उनकी वास्तविक नीतियों और दृष्टिकोण को समझने की आवश्यकता है।

विवाद के राजनीतिक आयाम

Amit Shah के बयान के बाद यह विवाद सिर्फ कांग्रेस और भाजपा के बीच नहीं, बल्कि भारतीय राजनीति में आंबेडकर के प्रति सम्मान और उनकी विचारधारा को लेकर भी एक बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। जहां भाजपा आंबेडकर के विचारों का अनुसरण करने का दावा करती है, वहीं कांग्रेस ने हमेशा आंबेडकर के योगदान को एक स्थायी धरोहर के रूप में माना है।

इस विवाद ने भारतीय राजनीति में आंबेडकर के विचारों को फिर से केंद्र में लाकर खड़ा कर दिया है। भारतीय राजनीति में उनकी भूमिका और उनके विचारों की अहमियत पर बहस जारी रहेगी।

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