Congress पार्टी ने उत्तर प्रदेश में अपनी कमेटियों को भंग करने का निर्णय लिया है, जो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा लिया गया है। यह कदम पार्टी के संगठनात्मक पुनर्निर्माण और आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र उठाया गया है। 2019 में प्रियंका गांधी के यूपी प्रभारी बनने के बाद से उत्तर प्रदेश Congress की कमेटियां बनी थीं, लेकिन अब इन्हें भंग करने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय के पीछे पार्टी नेतृत्व की रणनीति है, जो 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में फिर से अपनी उपस्थिति और प्रभाव को स्थापित करने की ओर इशारा करता है।
संगठनात्मक बदलाव की आवश्यकता
Congress पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मानते हैं कि यूपी में पार्टी की स्थिति को फिर से मजबूत करने के लिए जरूरी है कि संगठन में बदलाव किया जाए। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इस संदर्भ में एक पत्र जारी किया, जिसमें उन्होंने खड़गे के इस कदम को संगठन के अंदर एक नई ऊर्जा लाने के प्रयास के रूप में देखा। Congress का मानना है कि पुराने नेतृत्व और कमेटियों को बदलने से पार्टी को एक नई दिशा मिलेगी, जिससे वह आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर सकेगी।
यूपी में Congress को फिर से खड़ा करने की जरूरत है। पार्टी की स्थिति पिछले कुछ सालों में कमजोर हुई है, खासकर 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में Congress को भारी हार का सामना करना पड़ा। 2019 में प्रियंका गांधी के यूपी प्रभारी बनने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि पार्टी राज्य में अपनी स्थिति मजबूत कर सकेगी, लेकिन नतीजे अब तक निराशाजनक रहे हैं।
हार के बाद नई रणनीति
हरियाणा और महाराष्ट्र में हाल ही में हुई करारी हार के बाद, कांग्रेस नेतृत्व ने यह महसूस किया कि पार्टी के संगठन में मौजूदा रणनीति में बदलाव की जरूरत है। पार्टी अब यूपी जैसे बड़े राज्य में अपनी रणनीति में नए प्रयोग करने के लिए तैयार है। उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति बहुसंख्यक वोटरों के बीच मजबूत करने के लिए पार्टी नेतृत्व दलितों और मुस्लिम समुदायों पर ध्यान केंद्रित करने का विचार कर रहा है।
उत्तर प्रदेश में नई नेतृत्व की संभावनाएं
Congress पार्टी का यह भी मानना है कि अगर उत्तर प्रदेश में अपनी पुरानी खोई हुई ताकत को फिर से हासिल करना है, तो पार्टी को नए नेतृत्व की जरूरत है। पार्टी के भीतर यह चर्चा चल रही है कि यूपी में कांग्रेस की कमान किसी मुस्लिम या दलित नेता को सौंपने का विचार किया जा सकता है, ताकि बसपा से दलितों का मोहभंग और मुस्लिम समुदाय का पार्टी के प्रति झुकाव को सही दिशा में मोड़ा जा सके।
हालांकि, Congress में यह विचार भी किया जा रहा है कि पार्टी के भीतर दलितों और मुस्लिमों के बीच संतुलन स्थापित किया जाए, ताकि दोनों समुदायों के बीच कांग्रेस की अपील को और अधिक मजबूती दी जा सके। यूपी में कांग्रेस की चुनावी सूरत बदलने के लिए पार्टी नेतृत्व यह मानता है कि नई ऊर्जा के साथ नेतृत्व में बदलाव किया जाए।
संगठनात्मक बदलाव के संकेत
Congress की सियासत में अब यह बदलाव संगठनात्मक स्तर पर भी दिखने वाला है। खड़गे ने इस बात की ओर भी इशारा किया है कि आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर कुछ बड़े फैसले लिए जाएंगे, जो 2027 के चुनावों की दिशा तय करेंगे। यूपी में कांग्रेस को फिर से खड़ा करने के लिए पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को एकजुट करना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
गौरतलब है कि Congress पार्टी लंबे समय से यूपी में संघर्ष कर रही है, जहां वह अपनी खोई हुई जमीन को फिर से वापस पाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। यूपी के सियासी माहौल में बीजेपी और समाजवादी पार्टी के बीच कड़ी टक्कर है, और कांग्रेस के लिए यहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराना एक कठिन कार्य है।
भाजपा और समाजवादी पार्टी के मुकाबले रणनीति
उत्तर प्रदेश में Congress का मुकाबला बीजेपी और समाजवादी पार्टी से है। बीजेपी ने यूपी में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है, जबकि समाजवादी पार्टी के पास भी राज्य में बड़ा वोट बैंक है। कांग्रेस के लिए इन दोनों दलों से मुकाबला करना आसान नहीं होगा। ऐसे में पार्टी नेतृत्व का मानना है कि संगठनात्मक बदलाव और नई नेतृत्व के साथ पार्टी को राज्य में एक मजबूत आधार तैयार करना होगा।
पार्टी के रणनीतिकारों का यह भी मानना है कि अगर यूपी में Congress की स्थिति मजबूत हो जाती है, तो यह राज्य के चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, यह चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि बीजेपी और समाजवादी पार्टी ने यूपी में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।
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