Iltija Mufti की हिंदुत्व पर कड़ी टिप्पणी: ‘हिंदुत्व एक बीमारी है, भगवान के नाम को कलंकित कर रहा है’
जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की बेटी Iltija Mufti ने हिंदुत्व को लेकर एक विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने इसे एक “बीमारी” करार दिया और आरोप लगाया कि इस विचारधारा ने लाखों भारतीयों को मानसिक रूप से प्रभावित किया है। उनका यह भी कहना था कि हिंदुत्व भगवान के नाम को कलंकित कर रहा है और “जय श्री राम” का नारा अब राम राज्य के सिद्धांत से बहुत दूर हो गया है।
‘जय श्री राम’ का नारा अब भीड़ द्वारा हत्या के लिए इस्तेमाल हो रहा है
Iltija Mufti का बयान उस समय आया जब 6 दिसंबर को एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में दावा किया जा रहा था कि कुछ लोग नाबालिग मुस्लिम लड़कों को ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने के लिए मजबूर कर रहे हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद, Iltija Mufti ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “यह नारा अब राम राज्य के बारे में नहीं है, बल्कि इसे अब हत्या और हिंसा के समर्थन में इस्तेमाल किया जा रहा है। हिंदुत्व की यह विचारधारा समाज में नफरत फैलाने के लिए जिम्मेदार है।”
उन्होंने हिंदुत्व की आलोचना करते हुए कहा कि यह विचारधारा 1940 के दशक में वीर सावरकर द्वारा प्रचारित की गई नफरत की विचारधारा है, जिसने भारत में धर्म के आधार पर विभाजन की नींव रखी। Iltija Mufti का कहना था, “हिंदू धर्म एक धर्मनिरपेक्षता, प्रेम और करुणा को बढ़ावा देने वाला धर्म है, लेकिन हिंदुत्व ने इसे एक जहरीली विचारधारा में बदल दिया है।”
हिंदुत्व के प्रभाव पर सवाल उठाते हुए इल्तिजा ने किया बयान
Iltija Mufti ने हिंदुत्व के प्रभाव पर सवाल उठाते हुए कहा, “इस विचारधारा ने भगवान के नाम को कलंकित किया है। यह उन मूल्यों का उल्लंघन कर रहा है जो भगवान राम और हिंदू धर्म के अन्य देवताओं के प्रति सम्मान को बढ़ावा देते थे। जय श्री राम का नारा अब सम्मान और भाईचारे का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हिंसा और नफरत को बढ़ावा देने वाला एक खतरनाक नारा बन चुका है।”
उन्होंने यह भी कहा कि हिंदुत्व की विचारधारा न केवल हिंदू धर्म को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि इसे समाज में गहरी दरारें पैदा करने का कारण भी बना रही है। उनका मानना है कि इस विचारधारा ने समाज को बांटने का काम किया है और देश में सामूहिक हिंसा और लिंचिंग जैसे मुद्दों को जन्म दिया है।
नाबालिग मुस्लिम लड़कों पर हुए हमले की कड़ी आलोचना
Iltija Mufti ने 7 दिसंबर को अपने एक और बयान में कहा था कि भगवान राम को शर्म से अपना सिर झुका लेना चाहिए और यह देखना चाहिए कि उनके नाम का इस्तेमाल कैसे हिंसा और नफरत फैलाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने एक घटना का हवाला दिया जिसमें नाबालिग मुस्लिम लड़कों को केवल इसलिए पीटा गया क्योंकि उन्होंने “जय श्री राम” का नारा लगाने से मना कर दिया था। इल्तिजा ने आरोप लगाया कि यह सब हिंदुत्व की विचारधारा के प्रभाव के तहत हुआ, जो हिंसा और नफरत को बढ़ावा देती है।
हिंदुत्व और इस्लाम: एक तुलना
Iltija Mufti ने हिंदुत्व की आलोचना करते हुए हिंदू धर्म और इस्लाम की तुलना भी की। उनका कहना था कि जैसे इस्लाम एक धर्म है जो शांति, प्रेम और सहिष्णुता का संदेश देता है, वैसे ही हिंदू धर्म भी उसी दिशा में चलता है। लेकिन हिंदुत्व ने इस धर्म के मूल्यों को विकृत कर दिया है और इसे एक जहर में बदल दिया है। उन्होंने कहा, “हमारे धर्मों को इस तरह से विकृत नहीं होना चाहिए। हमें इसे जानबूझकर खराब नहीं करना चाहिए।”
Iltija Mufti की टिप्पणियों पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
Iltija Mufti के इस बयान पर राजनीति भी गर्मा गई है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) नेता के इस बयान को विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा लेकर प्रतिक्रियाएं दी जा रही हैं। कुछ लोगों ने इल्तिजा के बयान का समर्थन किया है, जबकि अन्य ने इसे विवादास्पद और सामूहिकता के खिलाफ बताया है। भाजपा और अन्य हिंदूवादी संगठनों ने इस बयान की कड़ी आलोचना की है और इल्तिजा को पाकिस्तान समर्थक तक करार दिया है।
मुफ्ती परिवार की राजनीति और हिंदुत्व का मुद्दा
Iltija Mufti के बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि मुफ्ती परिवार जम्मू-कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में बढ़ते हिंदुत्व के प्रभाव को लेकर चिंतित है। महबूबा मुफ्ती, जो जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री रही हैं, ने भी हिंदुत्व को लेकर कई बार आलोचनात्मक बयान दिए हैं। उनका कहना है कि इस विचारधारा के तहत जम्मू-कश्मीर और अन्य मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में असुरक्षा का माहौल बढ़ रहा है।
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