मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समय सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आमजन को निर्बाध और नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करने में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए। मंगलवार को मुख्यमंत्री निवास पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की वर्ष 2025-26 की बजट घोषणाओं की समीक्षा बैठक में उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वृहद जल परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है, जिससे प्रदेशभर में पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित होगी। उन्होंने लंबित परियोजनाओं की निविदाओं में तेजी लाकर कार्यादेश शीघ्र जारी करने के निर्देश भी दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पेयजल परियोजनाओं के कार्यों को विभिन्न चरणों में विभाजित कर सतत पर्यवेक्षण किया जाए। अधिकारी फील्ड में जाकर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करें और यदि कॉन्ट्रैक्टर समय पर कार्य पूरा नहीं करता है तो जुर्माना लगाया जाए। जिन क्षेत्रों में दीर्घकालिक परियोजनाएं चल रही हैं, वहां वैकल्पिक जल आपूर्ति की व्यवस्था भी की जाए।
जल जीवन मिशन की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि इस परियोजना से राजस्थान को सबसे अधिक लाभ होगा और उपभोक्ताओं को आसानी से नल से जल मिल सकेगा। उन्होंने अवैध कनेक्शन धारकों पर कड़ी कार्रवाई करने और मुख्यमंत्री जल जीवन मिशन (शहरी) के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भी दिशा-निर्देश दिए।
पाइपलाइन बिछाने के लिए होने वाली रोड कटिंग और पुनर्निर्माण के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, सार्वजनिक निर्माण और स्वायत्त शासन विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया। सड़कों के पुनर्निर्माण की गुणवत्ता जांच तृतीय पक्ष से कराने के निर्देश भी दिए गए।
अमृत 2.0 योजनाओं के तहत पंप हाउस, जलाशयों, पाइपलाइन, जल प्रदाय परियोजनाओं के संवर्धन और सुदृढ़ीकरण कार्यों की गहन समीक्षा की गई। बैठक में निविदाओं की वर्तमान स्थिति, प्रक्रियाधीन परियोजनाओं और हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के तहत प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। बैठक में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैया लाल चौधरी, मुख्य सचिव सुधांश पंत सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।