डूंगरपुर से शिक्षा व्यवस्था की एक ऐसी डराने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर आप हैरान रह जाएंगे। यहाँ बच्चों में पढ़ने का जज्बा तो है, लेकिन सिस्टम की लापरवाही उनके जीवन पर भारी पड़ रही है। शिक्षा विभाग के एक आदेश ने मासूम बच्चों के हाथों में कलम की जगह नाव के चप्पू थमा दिए हैं। अब ये बच्चे उफनता हुआ बांध पार कर स्कूल जाने को मजबूर हैं।
मामला हीराता पंचायत के हामीतेड़ फला का है। यहाँ के प्राथमिक विद्यालय के जर्जर भवन को विभाग ने ‘नाकारा’ घोषित कर दिया। समाधान निकालने के बजाय, विभाग ने स्कूल को बांध के दूसरे छोर पर स्थित बंदड़ा स्कूल में शिफ्ट कर दिया। अब रोजाना 24 मासूम बच्चे लकड़ी की छोटी सी नाव में सवार होकर मारगिया बांध का गहरा पानी पार करते हैं। 5 से 8 बच्चे एक साथ नाव में बैठते हैं और खुद ही चप्पू चलाकर दूसरे किनारे पहुंचते हैं। अगर बच्चे पैदल जाना चाहें, तो उन्हें जंगल के बीच से 7 किलोमीटर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, जहाँ जंगली जानवरों का खतरा और कीचड़ भरा रास्ता उनकी राह रोकता है।

जिला परिषद सदस्य सुरमाल रोत ने बताया कि “रास्ता लंबा और जंगली जानवरों से भरा है। बारिश में हालात और खराब हो जाते हैं। विभाग को चाहिए कि हामीतेड़ में ही नया भवन बनाकर स्कूल शुरू करे, ताकि बच्चों की जान जोखिम में न रहे।” हवा के झोंकों से डगमगाती नाव और गहरा पानी… हर पल किसी अनहोनी का डर बना रहता है। ग्रामीण और अभिभावक मांग कर रहे हैं कि उनके बच्चों के भविष्य और जीवन के साथ यह खिलवाड़ बंद हो। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन किसी हादसे का इंतजार कर रहा है या समय रहते जागता है।