PM Modi ने प्रवासी भारतीयों को भारत का राजदूत बताया, कहा- उन्होंने वैश्विक मंच पर भारत का सिर ऊंचा किया
PM Modi ने हाल ही में आयोजित ’18वें प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन’ के उद्घाटन में प्रवासी भारतीयों को विदेशों में भारत का राजदूत करार दिया और कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत और सामाजिक मूल्यों से दुनिया में भारत का सिर ऊंचा किया है। PM Modi ने ओडिशा राज्य के भव्य जनता मैदान में इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए यह भी कहा कि प्रवासी भारतीयों ने वैश्विक समुदाय में भारत के सम्मान को बढ़ाया है।
PM Modi ने इस अवसर पर भारत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को भी संबोधित किया। उन्होंने ओडिशा राज्य के धौली को शांति का प्रतीक बताया, जहां सम्राट अशोक ने शांति का मार्ग चुना था। उनका कहना था कि जब दुनिया में युद्ध और संघर्ष हो रहे हैं, तो भारत की यह धरोहर दुनिया को शांति और अहिंसा का संदेश देती है।
प्रवासी भारतीयों का योगदान वैश्विक मंच पर
PM Modi ने प्रवासी भारतीयों को विशेष रूप से सम्मानित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में, उन्होंने कई देशों के नेताओं से मुलाकात की है और इन नेताओं ने हमेशा प्रवासी भारतीयों की सामाजिक गतिविधियों, उनके सामाजिक मूल्यों और उनके योगदान की सराहना की है। PM Modi ने प्रवासी भारतीयों की अहम भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी मेहनत, संघर्ष और सामाजिक समर्पण ने भारत को एक सम्मानजनक स्थान दिलवाया है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत का हर प्रवासी भारतीय ‘भारत का राजदूत’ है, जो अपनी कर्मभूमि में भारतीय संस्कृति, परंपरा और भारत के समृद्ध इतिहास का प्रचार करता है। उन्होंने प्रवासी भारतीयों का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “आपने हमें गर्व का अवसर दिया है, और आपने हर जगह भारत का नाम रोशन किया है।”
भारत की समृद्ध विरासत और ओडिशा की ऐतिहासिक धरोहर
PM Modi ने ओडिशा राज्य की ऐतिहासिक धरोहर का भी उल्लेख किया और कहा कि ओडिशा भारतीय सभ्यता और संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा, “ओडिशा की भूमि पर कदम रखते ही हम भारत की समृद्ध विरासत को महसूस कर सकते हैं।” प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र के ऐतिहासिक स्थल जैसे उदयगिरि, खंडगिरि, कोणार्क का सूर्य मंदिर, और ताम्रलिप्ति के बंदरगाहों की चर्चा की, जो भारतीय समुद्री व्यापार और संस्कृति के प्रतीक हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि ओडिशा के व्यापारियों और सौदागरों ने सैकड़ों साल पहले बाली, सुमात्रा और जावा जैसे देशों में समुद्री यात्राएं की थीं। ओडिशा में बाली यात्रा का आयोजन आज भी इसी ऐतिहासिक परंपरा की याद में किया जाता है। PM Modi ने यह स्पष्ट किया कि ओडिशा का धौली क्षेत्र विशेष रूप से शांति का प्रतीक है, जहां सम्राट अशोक ने शांति का मार्ग चुना था, जबकि उस समय दुनिया में युद्ध और साम्राज्य विस्तार की प्रक्रिया चल रही थी।
वैकल्पिक दृष्टिकोण – युद्ध नहीं, बुद्ध की राह
PM Modi ने इस बात पर जोर दिया कि धौली की शांति की विरासत आज भी भारत के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा, “यह विरासत हमें यह सिखाती है कि भविष्य बुद्ध के सिद्धांतों में है, युद्ध में नहीं।” PM Modi ने इस बयान के माध्यम से यह संदेश दिया कि भारत दुनिया को अहिंसा और शांति के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करता है, जबकि वैश्विक मंच पर कई स्थानों पर संघर्ष और युद्ध जारी हैं।
प्रवासी भारतीय दिवस: भारत और प्रवासियों के बीच मजबूती का प्रतीक
PM Modi ने प्रवासी भारतीय दिवस के महत्व को भी रेखांकित किया और कहा कि यह दिन भारत और उसके प्रवासियों के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने इस दिन को एक ऐसा अवसर बताया जब भारतीयों और प्रवासी भारतीयों का समागम होता है और वे भारतीय संस्कृति, अपनी जड़ों, और देश की प्रगति का जश्न मनाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रवासी भारतीय दिवस भारत और उसके प्रवासियों के बीच सशक्त बंधन बनाने का काम कर रहा है, और यह समय की आवश्यकता है कि भारत और उसकी वैश्विक भारतीय समुदाय के बीच एकजुटता और सहयोग को और अधिक प्रगति मिले।
संगीत और कला के माध्यम से भारतीय संस्कृति का प्रचार
कार्यक्रम में PM Modi ने ग्रैमी पुरस्कार विजेता रिकी केज और उनकी टीम की प्रस्तुति की भी सराहना की, जिसमें भारतीय प्रवासियों की भावनाओं और उनके योगदान को खूबसूरती से प्रस्तुत किया गया था। इस शानदार प्रस्तुति ने न केवल भारतीय संगीत और कला की महत्ता को दर्शाया, बल्कि भारत की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि को भी प्रदर्शित किया।
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