ED की छापेमारी: पूर्व विधायक बलजीत यादव पर 3.72 करोड़ के घोटाले का आरोप, 10 ठिकानों पर रेड
पूर्व विधायक बलजीत यादव पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा शुक्रवार सुबह छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में ED ने जयपुर समेत विभिन्न शहरों में यादव के 10 ठिकानों पर रेड मारी, जिनमें जयपुर, दौसा और अलवर के ठिकाने शामिल हैं। इस छापेमारी के पीछे आरोप है कि बलजीत यादव की फर्म ने सरकारी स्कूलों में घटिया सामान की आपूर्ति की थी और इससे 3.72 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ। ED की इस छापेमारी के दौरान पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत कार्रवाई की गई, जिसका उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित मामलों की जांच करना और अवैध संपत्ति की जब्ती करना है।
बलजीत यादव पर आरोप: सरकारी स्कूलों में घटिया सामान आपूर्ति
पूर्व विधायक बलजीत यादव पर आरोप है कि उनकी कंपनियों ने सरकारी स्कूलों के लिए घटिया और अव्यवस्थित सामग्री की आपूर्ति की, जिससे सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान हुआ। खासकर विधायक कोष का दुरुपयोग किया गया, जिसमें नियमों का उल्लंघन किया गया। आरोप है कि टेंडर देने वाली फर्मों ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया, जिससे घोटाला हुआ। साथ ही, यह भी आरोप है कि नियमों के तहत परमिशन लेने के बावजूद इसे अनदेखा किया गया और इस भ्रष्टाचार में शामिल लोगों ने नियमों को तोड़ा।
3.72 करोड़ का घोटाला और फर्जी दस्तावेजों का मामला
ED सूत्रों के मुताबिक, आरोप है कि यादव और उनके सहयोगियों ने विधायक कोष से जुड़े 3.72 करोड़ रुपए का घोटाला किया। घोटाले का मुख्य हिस्सा यह है कि इन कंपनियों ने सरकारी स्कूलों के लिए क्रिकेट और बैडमिंटन किट की खरीदारी की, लेकिन वास्तविक कीमत से ढाई गुना अधिक मूल्य पर सामान खरीदी गई। ED का कहना है कि इस तरीके से घोटाले ने सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया और राज्य सरकार को राजस्व की हानि हुई।
छापेमारी के दौरान पाए गए अहम दस्तावेज
ईडी की टीम ने बलजीत यादव के ठिकानों पर जांच के दौरान कुछ अहम दस्तावेजों की पहचान की, जो इस घोटाले को और भी पुष्ट करते हैं। यह दस्तावेज इस बात को साबित करते हैं कि यादव की कंपनियों ने सरकारी टेंडरों के दौरान फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया और उन्हें लेकर विधायक कोष में घोटाले को अंजाम दिया। जांच एजेंसी अब इन दस्तावेजों की गहनता से जांच कर रही है ताकि मामले की पूरी सच्चाई सामने आ सके।
बलजीत यादव का राजनीतिक इतिहास: गहलोत सरकार का समर्थन
पूर्व विधायक बलजीत यादव ने 2018 से 2023 तक राजस्थान के बहरोड़ विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक के रूप में कार्य किया। वह अपनी विधानसभा में अशोक गहलोत सरकार को समर्थन देने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल थे और राज्यसभा चुनावों के दौरान भी उन्होंने कांग्रेस के पक्ष में वोट डाला था। हालांकि, उनका नाम अब भ्रष्टाचार के मामले में आने से उनके राजनीतिक करियर पर सवाल उठ रहे हैं।
पीएमएलए एक्ट के तहत ED की कार्रवाई
पेम्ला (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) एक प्रमुख कानून है जिसे भारत सरकार ने 2005 में लागू किया था। इसका उद्देश्य मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध संपत्ति की रोकथाम करना है। पीएमएलए एक्ट के तहत, प्रवर्तन निदेशालय (ED) किसी भी प्रकार के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच करता है और जब्त की गई संपत्ति को कानून के तहत प्रक्रिया के द्वारा निर्धारित करता है। इस एक्ट के तहत, यदि किसी व्यक्ति पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप सिद्ध होता है तो उसकी संपत्ति को जब्त किया जा सकता है।
ईडी की कार्रवाई से जुड़े प्रमुख बिंदु
- 3.72 करोड़ का घोटाला: बलजीत यादव पर आरोप है कि उनकी कंपनियों ने सरकारी स्कूलों में घटिया सामग्री की आपूर्ति की और विधायक कोष का दुरुपयोग कर 3.72 करोड़ का घोटाला किया।
- फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल: आरोप है कि टेंडर देने वाली कंपनियों ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर इस घोटाले को अंजाम दिया।
- घाटा और सरकार को नुकसान: शार्दूल ठाकुर और उनकी कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने सरकार को अतिरिक्त लागत पर क्रिकेट और बैडमिंटन किट खरीद कर नुकसान पहुँचाया।
- चुनावी समर्थन: बलजीत यादव ने कांग्रेस को राज्यसभा चुनाव में समर्थन दिया था और गहलोत सरकार के पक्ष में भी खड़े रहे थे।
छापेमारी की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
बलजीत यादव के खिलाफ ED की छापेमारी के बाद उनके समर्थकों और विपक्षी दलों के बीच चर्चा शुरू हो गई है। जहां एक ओर यादव के समर्थक इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे भ्रष्टाचार का एक और उदाहरण मानते हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ED इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करती है और क्या बलजीत यादव पर आरोप साबित होते हैं या नहीं।
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