भारत-फिलीपींस रिश्ते को मिला सामरिक साझेदारी का दर्जा

By admin
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भारत और फिलीपींस ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को नया मुकाम देते हुए इन्हें सामरिक साझेदारी का दर्जा देने का फैसला किया है। इस ऐतिहासिक निर्णय के साथ दोनों देशों ने एक व्यापक कार्य योजना पर भी सहमति जताई है, ताकि इस साझेदारी से ठोस परिणाम हासिल किए जा सकें।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर के साथ हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद इस फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रही है, और इसलिए इसका विशेष महत्व है। मोदी ने कहा कि हालांकि राजनयिक संबंध हाल के हैं, लेकिन भारत और फिलीपींस की सभ्यताएं प्राचीन काल से एक-दूसरे से जुड़ी रही हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति मार्कोस के साथ द्विपक्षीय सहयोग, क्षेत्रीय मसलों और वैश्विक हालातों पर विस्तार से चर्चा की। दोनों देशों ने यह सहमति बनाई कि नौसेना सहयोग, मानवीय सहायता, विकास परियोजनाएं और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत किया जाएगा।

मोदी ने बताया कि भारत फिलीपींस में विकास सहयोग के तहत कई नई परियोजनाएं शुरू करेगा। दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच चल रहे अभ्यासों का भी उन्होंने उल्लेख किया, जो समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम है।

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भी दोनों देशों ने सकारात्मक फैसले लिए हैं। फिलीपींस द्वारा भारतीय पर्यटकों को वीज़ा-फ्री एंट्री देने के निर्णय का भारत ने स्वागत किया है और जवाब में भारत ने भी फिलीपींस के नागरिकों के लिए फ्री ई-वीज़ा सुविधा देने का फैसला किया है। इसके अलावा, दिल्ली और मनीला के बीच सीधी उड़ान की शुरुआत की योजना पर भी काम किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करने और आतंकवाद के खिलाफ भारत के साथ खड़े होने के लिए फिलीपींस सरकार और राष्ट्रपति मार्कोस का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की “एक्ट ईस्ट नीति” और “महासागर विज़न” में फिलीपींस एक अहम साझेदार है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम आधारित व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रधानमंत्री ने दोहराया कि भारत और फिलीपींस अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार नौवहन की स्वतंत्रता का समर्थन करते हैं।

मोदी ने कहा, “भारत और फिलीपींस अपनी इच्छा से मित्र और नियति से साझेदार हैं। हिंद महासागर से लेकर प्रशांत महासागर तक, हम साझा मूल्यों से एकजुट हैं। हमारी दोस्ती सिर्फ़ अतीत की नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक वादा है।”

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