Maharashtra विधानसभा Elections कल, 288 सीटों पर वोटिंग; BJP 149, Congress 101 सीटों पर चुनाव लड़ रही, 6 बड़ी पार्टियां समेत 158 दल मैदान में

By Editor
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महाराष्ट्र विधानसभा Elections 2024: 288 सीटों के लिए सिंगल फेज वोटिंग, 158 दल मैदान में

महाराष्ट्र विधानसभा के 288 सीटों के लिए चुनावी रण 2024 में एक बार फिर सिंगल फेज़ मतदान के साथ शुरू होगा। राज्य में हो रहे इस Elections में कुल 158 दल चुनावी मैदान में हैं, जिसमें छह बड़ी पार्टियां दो प्रमुख गठबंधनों के तहत अपनी किस्मत आजमा रही हैं। इन Elections में एक बार फिर से राजनीतिक संघर्ष तीव्र हो चुका है, खासकर शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के टूटने के बाद।

गठबंधन की नई तस्वीर

इस बार के महाराष्ट्र विधानसभा Elections में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिंदे गुट की शिवसेना, अजित पवार के नेतृत्व वाली NCP महायुति (Mahayuti) गठबंधन का हिस्सा हैं। वहीं, कांग्रेस, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) और शरद पवार की NCP(SP) महाविकास अघाड़ी (MVA) के तहत एकजुट हो रहे हैं। ये गठबंधन पिछले कई वर्षों से राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, और इस चुनाव में इनकी शक्ति परीक्षण होगा।

भा.ज.पा और शिवसेना का गठबंधन टूट चुका है

महाराष्ट्र विधानसभा Elections 2019 में भाजपा-शिवसेना का गठबंधन था, जिसमें भाजपा ने 105 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि शिवसेना को 56 सीटें मिली थीं। वहीं, कांग्रेस को 44 और NCP को 54 सीटें मिली थीं। गठबंधन के बावजूद सत्ता की बागडोर भाजपा-शिवसेना के हाथ में थी, लेकिन गठबंधन टूटने के बाद राज्य की राजनीति में उथल-पुथल मच गई।

राजनीतिक घटनाक्रम: मुख्यमंत्री की शपथ और इस्तीफा

2019 के चुनावों के बाद, महाराष्ट्र की राजनीति ने कई चौंकाने वाले मोड़ देखे। नवंबर 2019 में देवेंद्र फडणवीस ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जबकि अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री का पद संभाला। लेकिन, यह गठबंधन लंबे समय तक नहीं टिक पाया। 26 नवंबर 2019 को बहुमत परीक्षण से पहले दोनों को इस्तीफा देना पड़ा, और फिर 28 नवंबर को शिवसेना, NCP और कांग्रेस ने महाविकास अघाड़ी सरकार बनाई, जिसमें उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया।

महाविकास अघाड़ी और बगावत का दौर

शिवसेना और NCP में बगावत के बाद महाविकास अघाड़ी सरकार संकट में घिरी और इन दोनों पार्टियों ने अलग-अलग राहों पर चलने का निर्णय लिया। खासकर शिवसेना और NCP के भीतर बगावत के बाद दोनों पार्टियां विभाजित हो गईं और अब ये अलग-अलग दलों के रूप में चुनावी मैदान में हैं। शरद पवार की NCP और उद्धव ठाकरे की शिवसेना का मिलकर महाविकास अघाड़ी (MVA) में शामिल होना, वहीं शिंदे गुट की शिवसेना और अजित पवार की NCP का महायुति में होना महाराष्ट्र की राजनीति के बदलते समीकरणों को दर्शाता है।

लोकसभा चुनाव में मिली बढ़त

महाराष्ट्र में हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों ने इन बदलते राजनीतिक समीकरणों की दिशा तय की थी। शरद पवार और उद्धव ठाकरे की पार्टियों को लोकसभा चुनाव में बढ़त मिली थी, जिससे राजनीतिक समीकरण और भी पेचीदा हो गए थे। लोकसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी को मिली सफलता ने राज्य में विपक्ष को उत्साहित किया, जबकि महायुति ने अपनी ताकत दिखाने की कोशिश की।

राज्य में सियासी उठा-पटक

महाराष्ट्र की राजनीति में यह सियासी उठा-पटक और गठबंधन के टूटने और बनने का सिलसिला अब कोई नई बात नहीं है। हालांकि, अब सबकी नजरें आगामी विधानसभा चुनावों पर टिकी हैं, जहां ये गठबंधन अपने-अपने हिस्से की सीटों के लिए मुकाबला करेंगे। वहीं, यह भी देखने की बात होगी कि पिछली बार की तरह भाजपा और शिवसेना के बीच एकजुटता हो पाती है या नहीं, क्योंकि शिवसेना का एक गुट अभी भी भाजपा के साथ है।

वोटिंग और चुनावी परिणाम की उम्मीदें

अब महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के परिणाम पर सबकी नजरें होंगी। राज्य के राजनीतिक माहौल को देखते हुए यह चुनाव बहुत ही महत्वपूर्ण बन गया है। जहां एक ओर महाविकास अघाड़ी की रणनीतियों से भाजपा को चुनौती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, वहीं भाजपा और शिंदे गुट के गठबंधन से मुकाबला होगा।

इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि में इन चुनावों का होना महाराष्ट्र की भविष्यवाणी के लिए महत्वपूर्ण होगा। आगामी दिनों में मतदाता अपनी पसंद का फैसला करेंगे, जो राज्य की राजनीति के भविष्य का निर्धारण करेगा।

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