बांसवाड़ा: गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय (GGTU), बांसवाड़ा एक बार फिर साहित्य, कला और बौद्धिक विमर्श का केंद्र बनने जा रहा है। विश्वविद्यालय और विश्व संवाद केंद्र, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित “माही टॉक फेस्ट 4.0” के पोस्टर का विधिवत विमोचन कर दिया गया है। इस वर्ष फेस्ट की थीम ‘एकात्म भारत’ रखी गई है।
यह तीन दिवसीय भव्य महोत्सव 23 से 25 जनवरी 2026 तक विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित होगा।

तीन दिन तक चलेगा विमर्श और संस्कृति का उत्सव
पोस्टर विमोचन के साथ ही फेस्ट की रूपरेखा भी सामने आ गई है। इस बार का आयोजन पहले से अधिक भव्य और विविधताओं से भरा होगा।
- साहित्यिक और बौद्धिक सत्र: फेस्ट में गंभीर विषयों पर मंथन होगा। इनमें ‘लोक साहित्य में एकात्म’, ‘आकाशवाणी व साहित्य’, ‘आनंद मठ – वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ और ‘राष्ट्र साधना की शताब्दी’ जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
- भव्य प्रदर्शनियां: साहित्य प्रेमियों के लिए नेशनल बुक ट्रस्ट (NBT) और देशभर के प्रतिष्ठित प्रकाशकों की पुस्तकों की प्रदर्शनी लगेगी। इसके अलावा, संविधान पर आधारित चित्र प्रदर्शनी, जनजातीय नायकों की गाथाएं और विभाजन की विभीषिका को दर्शाती विशेष प्रदर्शनियां भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी।
मल्लखंभ और नाटकों का विशेष आकर्षण
‘माही टॉक फेस्ट 4.0’ में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक अद्भुत श्रृंखला देखने को मिलेगी।
- इस बार पारंपरिक भारतीय खेल मल्लखंभ का प्रदर्शन सबसे खास आकर्षण रहेगा।
- वागड़ की वीरबाला काली बाई की शौर्य गाथा को कठपुतली प्रदर्शन के जरिए जीवंत किया जाएगा।
- भक्त शिरोमणि मीरा बाई पर संगीतमय कथा (म्यूजिकल स्टोरी) और वीरांगना रानी अवंतीबाई के जीवन पर आधारित नाट्य मंचन होगा। ‘बावरी साधना’ का मंचन भी किया जाएगा।
युवाओं के लिए प्रतियोगिताएं और पंजीकरण
युवाओं को जोड़ने के लिए फेस्ट में कई रोचक प्रतियोगिताएं रखी गई हैं:
- रिल्स मेकिंग (विषय: नागरिक शिष्टाचार)
- कहानी कथन (विषय: वागड़ में आध्यात्मिक धारा)
- ड्राइंग प्रतियोगिता
आयोजन में भाग लेने और प्रतियोगिताओं में शामिल होने के लिए इच्छुक विद्यार्थी और नागरिक पोस्टर पर दिए गए क्यूआर कोड (QR Code) को स्कैन करके अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
फेस्ट का उद्देश्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. केशव सिंह ठाकुर के अनुसार, माही टॉक फेस्ट का उद्देश्य इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक, साहित्यिक और बौद्धिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। यह महोत्सव युवाओं को सार्थक संवाद और सृजन से जोड़ने में एक सेतु का काम करेगा।